English grammar, storytelling, poetic expression
Shakilddin Ansari, a dedicated blogger from Shahjahanpur, crafts compelling stories, writing, offering readers a window into extraordinary lives. A versatile and passionate blogger, this writer captivates readers by blending creativity, knowledge, and insight, seamlessly weaving English grammar, storytelling, poetic expression, Hadith lessons, moral stories, and scientific facts into thoughtfully crafted content that educates, inspires, and bridges tradition with modernity.
Sunday, 5 July 2026
नज़्म
नज़्म: "तेरा ज़िक्र हर लम्हा"
तू है मलिक, तू है क़ुद्दूस, तू है सलाम,
हर सांस में तेरा ही है मुक़ाम।
तू है ग़फ़्फ़ार, तू है सत्तार,
गुनाहों का है तू परदा-दार।
तू अल्लाह, तू है वाहिद, तू ही सुमद,
तेरे नाम से जुड़ता है हर अहमद।
तू है बासित, तू है राफ़े,
मुश्किलों को कर दे आसान सफ़े।
तू करीम, तू रहीम, तू अल-हक़,
तेरी बंदगी में है हर दिल की चहक।
तू है नूर, तू है वहीद,
तेरे फ़ज़्ल से ही है ये सारी उम्मीद।
तू है अल-रहमान, तू अल-मालिक,
तेरी रहमतों का न हो कोई मालिक।
तू अल-रज़्ज़ाक, तू अल-ख़ालिक,
तेरे ही करम से हर दिल है मुसालिक।
........
**नज़्म: "तू ही सबका सहारा"**
*(तर्ज़: नात-ए-रसूल के तरन्नुम में)*
**शेर 1:**
तू है वदूद, तू है वली,
हर सांस में बस तेरा ही जली।
तू है ग़फार, तू है सत्तार,
तेरे करम से हर दिल गुलज़ार।
**तरन्नुम:**
(तू ही तो है, ओ मेरे मौला,
तेरे बिना कोई भी ना सहारा।
तेरे बिना कोई भी ना सहारा।)
**शेर 2:**
तू है नसीर, तू है बसीर,
हर राह में तेरा ही ज़मीर।
तू है मलिक, तू है क़ुद्दूस,
तेरे फ़ज़ल से हर ग़म दूर।
**तरन्नुम:**
(तेरी रहमत की बारिश हो,
हर दिल में तेरा ही नूर हो।
हर दिल में तेरा ही नूर हो।)
**शेर 3:**
तू है रहीम, तू है हकीम,
तेरे बिना सब कुछ है अधूरी तदबीर।
तू है जब्बार, तू है क़ह्हार,
तेरे हुक्म से सजी ये दुनिया के दीवार।
**तरन्नुम:**
(तेरा ही नाम हर जुबां पर हो,
तेरी इबादत ही मुकम्मल हो।
तेरी इबादत ही मुकम्मल हो।)
**शेर 4:**
तू है अल-हक़, तू है अल-रौफ,
तेरी बंदगी से जुड़ा हर एक सूफ़।
तू है अल-अज़ीम, तू है करीम,
तेरे बिना सब ख्वाब हैं नाकाम-ए-तालीम।
**तरन्नुम:**
(तू ही सुकून है, तू ही जहां,
तेरा करम रहे हर दास्तां।
तेरा करम रहे हर दास्तां।)
**ख़त्म:**
(तू है करीम, तू है रहीम,
बस तुझसे ही सब कुछ है।
तेरी बंदगी में है सुकून,
तेरी रहमत से सब कुछ है।)
Praise be to Allah, description of the blessings of Allah's universe
**बिस्मिल्लाह-इर-रहमान-इर-रहीम**
**मौलाए कायनात की नेमतों का बयान**
अल्लाह तआला की इस अज़ीम कायनात में उसकी बेशुमार नेमतें छुपी हुई हैं, जो इंसान की हर जरूरत को पूरा करने के लिए वजूद में आईं। हर नेमत में उसकी रहमत और बरकत का इज़हार है।
**सूरज और चाँद का निज़ाम**
खुदा-ए-पाक ने सूरज को रोशनी और गर्मी का सरचश्मा बनाया, जिससे यह कायनात रोशन और जिंदगी मुमकिन हुई। चाँद की ठंडी रोशनी रातों की ताजगी का सबब बनी। ये दोनों एक हिसाब से चलते हैं, जिससे इंसान वक़्त का हिसाब रखता है।
**जमीन की नेमतें**
जमीन को खुदा ने इंसान के लिए जन्नत का टुकड़ा बनाया। इसके सीने में फसलें, पानी के चश्मे, और खनिज छुपाए। फसलें हमारी भूख मिटाती हैं, पानी हमारी प्यास बुझाता है, और खनिज हमारे मकान और औज़ारों के काम आते हैं।
**हवा और पानी की अहमियत**
हवा को बिना रंग और शक्ल के बनाया, मगर इसमें जिंदगी का हर जरिया छुपा दिया। इसी तरह पानी को जिंदगी की बुनियाद बनाया, जिसके बिना इंसान का वजूद नामुमकिन है। ये खुदा की ऐसी नेमतें हैं जो हर पल हमारी मददगार हैं।
**इंसानी जिस्म की करामत**
इंसान का जिस्म खुदा की कुदरत का सबसे आला नमूना है। दिल की धड़कनें, आँखों की रौशनी, कानों की समाअत, और हाथों-पैरों की ताकत, ये सब अल्लाह की नेमतें हैं। इंसान अपने जिस्म के जरिये खुदा की दी हुई कुदरत का इस्तेमाल करता है।
**बुलंद परिंदे और गहरे समंदर**
खुदा ने परिंदों को परवाज़ का हुनर दिया और समंदरों को रहमतों का खज़ाना बनाया। परिंदों के पर इंसान को आजादी का पैगाम देते हैं, और समंदर से मिलने वाले मोती और मछलियाँ हमारे रहन-सहन को बेहतर बनाती हैं।
**खुदा की नेमतों का शुक्र**
हर मुसलमान पर फर्ज है कि वह इन नेमतों का शुक्र अदा करे। अल्लाह फरमाता है:
*"फबिऐय्यि आलाअि रब्बिकुमा तुकज्जिबान"*
(तो अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?)
**इंसान का फर्ज**
इंसान को चाहिए कि इन नेमतों का सही इस्तेमाल करे, बेजा इस्तेमाल और फिजूलखर्ची से बचे। शुक्रगुजार बने, नमाज और दुआ के जरिये अल्लाह का शुक्र अदा करे और उसकी बनाई हुई कायनात में अमन और इन्साफ कायम रखे।
**खुदा-ए-पाक की कुदरत पर शेर:**
*"खुदा की रहमतों का है जहाँ में हर तरफ चर्चा,
जो देखे उस कायनात को, बस कहे अल्हम्दुलिल्लाह।"*
यह पूरी कायनात अल्लाह की रहमतों का आईना है, जो हर पल हमें उसकी मौजूदगी का एहसास दिलाती है।
शबे बरात
हदीस में शबे बरात का जिक्र:
शबे बरात के बारे में कुछ अहादीस मिलती हैं, जिनमें बताया गया है कि यह रात मग़फिरत (बख्शिश) और रहमत की रात होती है।
1️⃣ हजरत अली रज़ी अल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी ए करीम ﷺ ने फरमाया:
"जब शाबान की 15वीं रात आती है, तो अल्लाह तआला आसमान-ए-दुनिया पर तजल्ली फरमाता है और बानू कल्ब के बकरों के बालों से ज्यादा लोगों को बख्श देता है।" (तिरमिज़ी, इब्ने माजा)
2️⃣ एक दूसरी हदीस में हजरत आयशा रज़ी अल्लाहु अन्हा फरमाती हैं कि
"मैंने एक रात रसूलुल्लाह ﷺ को बिस्तर पर न पाया, तो मैं बाहर निकली और देखा कि आप जन्नतुल बक़ी के कब्रिस्तान में तशरीफ फरमा हैं। आप ﷺ ने फरमाया: ‘अल्लाह शाबान की 15वीं रात को आसमान-ए-दुनिया पर तजल्ली फरमाता है और बनी कल्ब की बकरियों के बालों से ज्यादा गुनाहगारों को बख्श देता है।’" (इब्ने माजा)
हदीस - इस रात का एहतिराम और इबादत
हज़रत अली (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलअल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया:
"जब शाबान की पन्द्रहवीं रात हो, तो उसमें क़ियाम (नमाज़) करो और दिन में रोज़ा रखो। बेशक अल्लाह तआला इस रात सूरज के गुरूब होते ही आसमान-ए-दुनिया पर नज़िल होता है और फ़रमाता है, ‘क्या कोई बख्शिश मांगने वाला है कि मैं उसे बख्श दूं? क्या कोई रिज़्क मांगने वाला है कि मैं उसे रिज़्क दूं? क्या कोई मुश्किल में है कि मैं उसकी मुश्किल हल कर दूं?’ यह सिलसिला सुबह तक जारी रहता है।"
(इब्ने माजा, हदीस: 1388)
शबे बरात की फजीलत:
🔹 इस रात में अल्लाह अपने बंदों की मग़फिरत करता है।
🔹 अल्लाह तआला बंदों की दुआएं कुबूल करता है।
🔹 इस रात तौबा करने वालों की बख्शिश होती है।
🔹 नेक अमाल करने की तौफीक दी जाती है।
शबे बरात में क्या करना चाहिए?
✅ नफिल नमाज़ पढ़ें।
✅ कुरआन-ए-पाक की तिलावत करें।
✅ अस्तग़फार करें और तौबा करें।
✅ दुआ करें, खासकर अपने लिए, अपने घरवालों और पूरे उम्मत के लिए।
✅ रोज़ा रखना भी सुन्नत से साबित है, क्योंकि नबी ﷺ शाबान के महीने में ज्यादा रोजे रखते थे।
शबे बरात में क्या नहीं करना चाहिए?
❌ बिना सुबूत के खास इबादतें करना जो नबी ﷺ से साबित न हों।
❌ आतिशबाजी या किसी तरह का गैर-इस्लामी जश्न मनाना।
❌ यह मानना कि यह रात किस्मत लिखने की रात है (क्योंकि तक़दीर का फैसला लैलतुल क़द्र में होता है)।
"जब शाबान की पंद्रहवीं रात आती है, तो अल्लाह तआला अपनी मखलूक़ की तरफ तजल्ली फरमाता है और सबको बख्श देता है, सिवाय उस शख्स के जिसके दिल में किसी से दुश्मनी हो और जिसने किसी की जान ली हो।"
निष्कर्ष:
शबे बरात एक मुबारक रात है जिसमें अल्लाह अपने बंदों की बख्शिश करता है। इस रात में ज्यादा से ज्यादा इबादत करनी चाहिए, दुआओं और तौबा का एहतमाम करना चाहिए। हालांकि, इस रात से जुड़ी कई रस्में जो लोगों में आम हो गई हैं, उनकी कोई दलील नहीं मिलती, इसलिए हमें सही इस्लामी तालीमात पर अमल करना चाहिए।
अल्लाह हमें सही समझ दे और इस मुबारक रात की बरकतों से नवाजे। आमीन!
नज़्म
دل کے چراغوں کو جلاؤ، ایمان کی روشنی سے،
رُوح کی پاکی ہو عطا، ذکرِ خدا کی زمینی سے۔
رنگوں میں بہار آئے، صفا ہو دل کی باغ میں،
جہاں بھی جاؤ، حق کی خوشبو ہو ہر راہ میں۔
زندگی ایک سفر ہے، آخر منزل آخرت،
عمل کا بیج بو دو، ہر وقت حق کی دعوت۔
جسم ہے خدا کی امانت، خیال رکھو اس کی،
حرام سے بچو ہمیشہ، رکھو فکر نور کی۔
عشق کا دیوانہ بنو، رحمت کے سائے میں،
فارسی کی محبت ہو، عربی کی دعاؤں میں۔
پاکی کا جام پیو، ایمان کے سلسلے میں،
پنجابی کی سرخی ہو، اور اردو کی لوری میں۔
زندگی کی تصویر ہو، وفا اور خلوص کی،
حقیقی سکون ملے، دل کے مخلص دوست کی۔
**(ترجمہ):**
روشنی کا پیغام یہ، دل کو صاف کرو،
ہر گام پر روشنی کی، منزل کا خواب رکھو۔
physics
फोटोइलेक्ट्रिक इफ़ेक्ट एक ऐसा वाक़िआ (घटना) है जिसमें जब किसी धातु (मेटल) की सतह पर कोई रोशनी (लाइट) पड़ती है, तो अगर उस रोशनी की फ़्रीक्वेंसी (तरंगों की गति) सही हो, तो उस धातु से इलेक्ट्रॉन निकलने लगते हैं। इस वाक़िए को सबसे पहले 1887 में हेनरिक हर्ट्ज़ ने देखा और बाद में 1902 में लीनार्ड ने भी इस पर तजुर्बा (प्रयोग) किया। लेकिन दोनों के तजुर्बों को उस वक़्त की मशहूर मैक्सवेल की वेव थ्योरी (तरंग सिद्धांत) से नहीं समझाया जा सका।
हर्ट्ज़, जिन्होंने वेव थ्योरी को साबित किया था, उन्होंने इस मामले को आगे नहीं बढ़ाया क्योंकि उन्हें यक़ीन था कि इसे वेव थ्योरी से ही समझाया जा सकता है। लेकिन ये सोच ग़लत साबित हुई, क्योंकि वेव थ्योरी इस वाक़िए को समझाने में नाकाम रही।
The photoelectric effect is a phenomenon in which, when light falls on the surface of a metal, electrons are emitted from it—provided the frequency of the light is sufficient. This phenomenon was first observed by Heinrich Hertz in 1887 and later by Lenard in 1902. However, their observations could not be explained using Maxwell’s electromagnetic wave theory of light.
Hertz, who had himself proven the wave theory, did not pursue the matter further, as he was confident that it could be explained using the wave theory. However, this assumption turned out to be incorrect because the wave theory failed to explain this phenomenon.
hadees
नबी करीम (सल्ल०) ने फ़रमाया, ''मेरा पैग़ाम लोगों को पहुँचाओ ! हालाँकि एक ही आयत हो और बनी-इसराईल के वाक़िआत तुम बयान कर सकते हो उन मैं कोई हरज नहीं और जिसने मुझ पर जानबूझ कर झूट बाँधा तो उसे अपने जहन्नम के ठिकाने के लिये तैयार रहना चाहिये।"सहीह अल-बुखारी (हदीस संख्या 3461)
Means मुझसे (जो कुछ भी) सुनो, उसे आगे पहुँचाओ, चाहे वह एक आयत ही क्यों न हो।"
इस्माईल-बिन-उमैया ने यहया-बिन-अब्दुल्लाह-बिन-सैफ़ी से, उन्होंने अबू-मअबद से और उन्होंने हज़रत इब्ने-अब्बास (रज़ि०) से रिवायत की कि जब रसूलुल्लाह ﷺ ने मुआज़ (रज़ि०) को यमन भेजा तो फ़रमाया : " तुम एक क़ौम के पास जाओगे (जो) अहले-किताब हैं, तो सबसे पहली बात जिस की तरफ़ तुम्हें उनको दावत देनी है। वो अल्लाह की इबादत है। जब वो अल्लाह को पहचान लें तो उन्हें बताना कि अल्लाह ने उनके दिन और रात में उन पर पाँच नमाज़ें फ़र्ज़ की हैं। जब इस पर अमल करने लगें तो उन्हें बताना कि अल्लाह ने उनपर ज़कात फ़र्ज़ की है। जो उनके (मालदारों के) मालों से लेकर उनके ग़रीबों को दी जाएगी। जब वो इसको मान लें तो उनसे (ज़कात) लेना और उन के ज़्यादा क़ीमती मालों से बचना।" सहीह मुस्लिम (हदीस संख्या 19)
हज़रत ज़ैद-बिन-साबित (रज़ि०) कहते हैं कि मैंने रसूलुल्लाह ﷺ को सुना, आप फ़रमाते थे : अल्लाह तआला इस शख़्स को ख़ुश-ख़ुर्रम और शादाब रखे जिसने हम से कोई हदीस सुनी फिर उसे याद किया और याद रखा ताकि उसे पहुँचाए, बहुत से इल्म और फ़िक़्ह के रखनेवाला अपने से बढ़ कर ज़्यादा दाना और फ़क़ीह (क़ानून का जानकार) लोगों को पहुँचाते हैं, और बहुत से इल्म और फ़िक़्ह के रखनेवाला ऐसे होते हैं जो हक़ीक़त में दाना और फ़क़ीह नहीं होते।सुनन अबू दाऊद (हदीस संख्या 3660)
Means जो व्यक्ति लोगों को हिदायत की ओर बुलाता है, उसे उन सभी लोगों के बराबर सवाब मिलेगा जो उसकी बात मानकर उस पर अमल करें, बिना उनके सवाब में कोई कमी किए।"
Enormous
pronunciation phonetic
यह उस हालत को बयान करता है जब किसी चीज़ का नतीजा या अंजाम साफ़ तौर पर मालूम न हो और कोई बात तय न हो।
उर्दू में इसे यूं समझा सकते हैं:
"जब किसी बात या हालात के बारे में यक़ीन न हो और वो साफ़ नहीं हो, तो उसे ग़ैर यक़ीनी कहते हैं।"
Enormous
Enormous का उच्चारण और विवरण इस प्रकार है:
1. अंतरराष्ट्रीय उच्चारण (IPA):
/ɪˈnɔːr.məs/
2. फोनेटिक उच्चारण:
इ-नॉर-मस
(यहां "इ" हल्का है, "नॉर" लंबे स्वर के साथ, और "मस" छोटा और साफ है।)
3. ररूआ और हिंदी तर्जुमा:
Enormous का मतलब है "बहुत बड़ा," "विशाल," या "गजब का।"
ररूआ उर्दू में: "بہت بڑا" (बहुत बड़ा), "عظیم" (अज़ीम)।
हिंदी में: "विशाल," "प्रचंड," "अत्यधिक।"
4. आसान शब्दों में उच्चारण:
इसे "इ-नॉर-मस" बोलें। "नॉर" में थोड़ा ज़ोर दें, और "मस" को हल्का रखें।
उदाहरण: "The building was enormous."
(उस इमारत का आकार विशाल था।)
Airborne" का मतलब होता है "हवा में मौजूद" या "हवा के जरिए फैलने वाला।"
___ इसका मतलब बता दीजिए लोकल भाषा पाकिस्तानी हिंदी में आसानी के साथ और उर्दू अल्फ़ाज़ और आसान लैंग्वेज का इस्तेमाल करें हिंदी टेक्स्ट में:
आसान भाषा में समझें तो जब कोई चीज़ हवा में उड़ रही हो या हवा के जरिए इधर-उधर जा रही हो, तो उसे Airborne कहते हैं।
उर्दू में इसे यूं समझा सकते हैं:
"हवा में होने वाली" या "हवा के ज़रिए फैलने वाली।"
जैसे:
अगर कोई जहाज़ उड़ रहा है, तो वह Airborne है।
(यानि जहाज़ हवा में उड़ रहा है।)
कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं जो हवा के ज़रिए फैलती हैं, उन्हें भी Airborne कहते हैं।
(जैसे फ्लू, कोविड वगैरह।)
उदाहरण:
"यह वाइरस Airborne है, इसलिए मास्क पहनना ज़रूरी है।"
(यानि वाइरस हवा के ज़रिए फैल सकता है।)
"Feathery" का मतलब है "पंखों जैसा" या "पंखों से भरा हुआ।" इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि कोई चीज़ बहुत हल्की, नर्म और मुलायम हो, जैसे परिंदों के पंख होते हैं।
उर्दू में इसे "परदार" या "पंखदार" भी कह सकते हैं।
जैसे:
बादल आसमान में हल्के और पंखों जैसे (feathery) दिख रहे थे।
उस परदे का कपड़ा बहुत मुलायम और परदार था।
आसान लफ़्ज़ों में, जब कोई चीज़ पंख जैसी नर्मी या हल्कापन दिखाए, उसे "feathery" कहते हैं।
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Eventually का मतलब होता है "आखिरकार," "आखिर में," या "आखिरकार अंत में।" यह तब इस्तेमाल किया जाता है जब किसी बात या घटना के होने में समय लगे, लेकिन वह अंत में हो ही जाए।
Eventually (British English): The word means "in the end, especially after a lot of delays, problems, or time." It is used to express the final result of a situation after some process or time.
Meaning in Simple Terms:
Finally, or after some time.
ररूआ तर्जुमा (आसान अल्फाजों में):
आखिरकार, या देर-सवेर।
मूल शब्द:
Eventually अंग्रेजी में "Event" (घटना) से निकला है, जिसका मतलब है किसी घटना या प्रक्रिया का अंतिम नतीजा।
कुछ उदाहरण वाक्य:
आयशा ने कहा कि वह मेहनत करती रही, और आखिरकार (eventually) उसे कामयाबी मिल ही गई।
अक्सा हमेशा कहती थी कि हम कोशिश करते रहें तो आखिर में (eventually) हमारी दुआ कबूल हो जाती है।
अगर तुम पढ़ाई करते रहोगे, तो आखिरकार (eventually) अच्छे नंबर मिलेंगे।
आयशा और अक्सा को यकीन था कि अल्लाह की रहमत से आखिरकार हालात बेहतर होंगे।
वह रोज़ मेहनत करती रही और आखिरकार (eventually) उसने अपनी मंज़िल पा ली।
Example Sentences with Aisha and Aqsa:
Aisha kept working hard, and eventually, she achieved her goals.
Aqsa always believed that if we keep trying, eventually, things will work out.
They waited for hours, but eventually, the bus arrived.
Aisha and Aqsa knew that patience would eventually bring them success.
If you study consistently, you will eventually get good grades.
नमाज
क़ज़ा नमाज़ (قضا نماز) और उम्र की क़ज़ा नमाज़ (عمر کی قضا نماز) का अंतर समझने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि "क़ज़ा नमाज़" क्या होती है।
क़ज़ा नमाज़ का मतलब:
"क़ज़ा" का शाब्दिक अर्थ है "छूटी हुई चीज़ को पूरा करना।" इस्लाम में, अगर कोई मुसलमान अपनी किसी फर्ज़ नमाज़ को समय पर नहीं पढ़ता है, चाहे वह भूल से हो, सो जाने की वजह से हो, या किसी और कारण से, तो इसे क़ज़ा करना फर्ज़ होता है।
हदीस से सबूत: रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:
"जो शख्स नमाज़ को भूल जाए या सोता रह जाए, तो वह इसे उस समय पढ़े जब उसे याद आए, क्योंकि इसकी कफ्फ़ारा यही है।"
(सहीह मुस्लिम, हदीस: 684)
हज़रत अबू हुरैरा (र.अ.) से रिवायत:
"अगर किसी का कोई अमल (इबादत) छूट जाए, तो अल्लाह उसे कजा करने का मौका देता है।"
(सहीह बुखारी, हदीस: 597)
इसमें नमाज़ की भरपाई के लिए कजा का इशारा मिलता है।
उम्र की क़ज़ा नमाज़ का मतलब:
"उम्र की क़ज़ा नमाज़" का मतलब है कि अगर किसी शख्स की पूरी ज़िंदगी में बहुत सी फर्ज़ नमाज़ें छूट गईं (चाहे वह जानबूझकर छोड़ी हों या भूल से), तो उसे अपनी पूरी उम्र की छूटी हुई नमाज़ों का हिसाब करके उन्हें पूरा करना होगा। इसे "उम्र की क़ज़ा" कहा जाता है।
उम्र की क़ज़ा की अहमियत:
इस्लाम में नमाज़ को सबसे अहम फर्ज़ माना गया है। अगर किसी ने बचपन से लेकर अब तक नमाज़ छोड़ दी है, तो उस पर यह जिम्मेदारी है कि वह तौबा करे और छूटी हुई नमाज़ों को पूरा करे।
कुरआन से सबूत:
"और नमाज़ को कायम करो और अल्लाह से डरो।"
(सूरह अल-बक़रह: 2:238)
हुक्म उम्र की क़ज़ा नमाज़ का:
तौबा करें: सबसे पहले अल्लाह से दिल से माफी मांगें कि आपने जानबूझकर या भूल से नमाज़ें छोड़ीं।
नमाज़ का हिसाब लगाएं: यह याद करें कि आपने कितने सालों तक नमाज़ नहीं पढ़ी और हर रोज़ की 5 नमाज़ें क़ज़ा करनी हैं।
नियत बनाएं: हर बार जब आप क़ज़ा नमाज़ पढ़ें, तो यह नियत करें कि यह आपकी छोड़ी हुई फर्ज़ नमाज़ की क़ज़ा है।
हदीस की रौशनी:
रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया:
"अल्लाह उस इंसान से खुश होता है जो गुनाहों से तौबा करे।" (सहीह बुखारी)
कैसे क़ज़ा नमाज़ें अदा करें?
नियमित (डेली) 5 वक्त की फर्ज़ नमाज़ अदा करने के बाद, छूटी हुई नमाज़ों की क़ज़ा पढ़ें।
शुरुआत हमेशा सबसे पुरानी छूटी नमाज़ों से करें।
सहूलियत के हिसाब से हर दिन कुछ क़ज़ा नमाज़ें जोड़ लें।
नोट:
तौबा के साथ-साथ कोशिश करें कि भविष्य में कोई नमाज़ ना छूटे।
अगर पूरी उम्र की नमाज़ों की क़ज़ा मुमकिन न हो, तो आप अल्लाह से दुआ करें और नफ्ल इबादतें करें।
निष्कर्ष:
क़ज़ा नमाज़: वह नमाज़ जो समय पर अदा न हो सकी, उसे बाद में अदा करना।
उम्र की क़ज़ा नमाज़: पूरी ज़िंदगी में जितनी फर्ज़ नमाज़ें छूट गईं, उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी।
इसे एक मुसलमान की प्राथमिकता होनी चाहिए, और इसे सच्चे दिल से करने पर अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखनी चाहिए।
उम्र के कजा नमाज़ पर उलमा की राय:
अधिकतर उलमा मानते हैं कि उम्र की छूटी हुई नमाज़ों की भरपाई करनी चाहिए, लेकिन अगर संख्या बहुत ज़्यादा हो और इंसान इसे पूरा करने में असमर्थ हो, तो तौबा और इस्तिगफार के साथ नफ्ल (अतिरिक्त) नमाज़ पढ़ना भी किया जा सकता है।
हनफ़ी फिक्ह के अनुसार, उम्र की छोड़ी हुई नमाज़ें अदा करना फर्ज़ है।
रिज़्क़ और कमाई में फ़र्क़ क्या है?
रिज़्क़ और कमाई में फ़र्क़ क्या है?
👉 कमाई (Profit)
वो है जो इंसान अपने हाथों की मेहनत से, कारोबार से या नौकरी से हासिल करता है।
जैसे कोई दुकानदार सौदा बेचकर मुनाफ़ा लेता है, या कोई मज़दूर अपनी मज़दूरी पाता है —
यह सब उसकी ज़ाहिरी कमाई है।
👉 रिज़्क़ (Sustenance)
रिज़्क़ वो हिस्सा है उस कमाई में से जो वाक़ई तुम्हारे काम आए,
जो अल्लाह तआ़ला ने तुम्हारे नसीब में लिखा है —
वो चाहे थोड़ा हो या ज़्यादा, वही असली रिज़्क़ है।
मिसाल से समझिए
फ़र्ज़ कीजिए किसी आदमी ने पूरे दिन मेहनत की और 1000 रुपये कमाए।
लेकिन उसमें से 200 रुपये उसने ज़रूरतमंद को दे दिए,
300 रुपये से घर चलाया,
और बाकी में से जो कुछ उसके काम आया — वही उसका रिज़्क़ था।
बाकी जो बर्बाद हो गया, चोरी हो गया या न काम आया — वो रिज़्क़ नहीं था।
असल बात क्या है?
रोज़ी कमाना हमारी कोशिश है,
मगर रिज़्क़ मिलना अल्लाह की मर्ज़ी और तक़दीर है।
इसलिए जो हिस्सा हमें वाक़ई नसीब होता है — वही हमारा रिज़्क़े हलाल कहलाता है।
Profit यानी मुनाफ़ा तो कई बार हराम तरीक़े से भी हो सकता है,
मगर रिज़्क़ सिर्फ़ हलाल रास्ते से आता है।
नतीजा
तो हाँ —
जो इंसान कमाता है, उसका profit उसका रिज़्क़ नहीं होता,
बल्कि उस profit का वही हिस्सा उसका रिज़्क़ होता है जो उसके काम आए और बरकत वाला हो।
बाकी जो सिर्फ़ गिनती में है, वो आज है और कल चला जाएगा।
क्या “रिज़्क़ (رزق)” कमाई या प्रॉफिट का हिस्सा होता है?
🌿 जवाब:
जी हाँ — रिज़्क़ कमाई (Profit) का हिस्सा तो होता है,
लेकिन पूरा Profit रिज़्क़ नहीं होता।
यानि —
जितनी भी तुम कमाई करते हो, उसमें से जो हिस्सा अल्लाह ने तुम्हारे नसीब में लिखा है,
जो तुम्हारे काम आता है, जो बरकत वाला है, जो हलाल है —
वही असली रिज़्क़ है।
हर कमाई में से रिज़्क़ एक हिस्सा होता है।
✅ Profit कमाई है, लेकिन हर profit रिज़्क़ नहीं होता।
✅ रिज़्क़ वही है जो हलाल हो, बरकत वाला हो, और काम में आए।
मेहनत से जो कमाए, वो कमाई नहीं होती,
बरकत जो अल्लाह दे, वही कमाई होती।
रिज़्क़ तो नसीब से मिलता है बंदे को,
वरना कई मेहनती भी खाली जाई होती।
हर एक लुक़्मे में रहमत की निशानी है,
न गिनती से, न तदबीर से, ये कहानी है।
मेहनत में है बरकत, यही असल कमाई,
हर लुक़्मा है रहमत, अगर हो सफ़ाई।
मुनाफ़ा वही जो हलाल राह से आए,
वरना दौलत भी रूह की रुसवाई।
मतलब:
कमाई सिर्फ़ नोट नहीं — एक नेमत है।
बरकत उसी में है जो हलाल और सच्ची मेहनत से आए।
अगर नीयत साफ़ हो, तो छोटा मुनाफ़ा भी रिज़्क़-ए-ख़ुदा बन जाता है,
और अगर नीयत में खोट हो, तो बड़ी दौलत भी बे-बरकत रहती है।
झूठ के शहर में सच का मुसाफ़िर ,सीरत-ए-नबी ﷺ: सुकून का रास्ता,,,, दर्द से दरूद तक” — क्योंकि इसमें आपकी पूरी शायरी का सफ़र (दुनिया की सच्चाई → दर्द → रब और रसूल ﷺ की मोहब्बत) आ जाता है।
वह सारे लोग मेरी आँख में खटकते हैं,
जो लब पे शहद मगर बुग़्ज़ दिल में रखते हैं।
निशानियों में से उनकी निशानी ये भी है,
हर एक बात पर ये पीठ पीछे हँसते हैं।
तमाम खूबियाँ इनमें ही पाई जाती हैं,
ये नेक लोग हैं, सबको बुरा समझते हैं।
तमाम नुस्ख़ इन्हें दूसरों में दिखते हैं,
दिखाए आईना कोई तो ये गरजते हैं।
तुम ऐसे लोगों के मुँह न लगा करो 'शकील',
बीमार लोग हैं, खुद को ख़ुदा समझते हैं।
‘शकील’ सच की राह में चाहे अकेला ही सही,
झूठ के शहर में हम सर झुका के चलते नहीं।
ये दौर ऐसा है चेहरों पे नक़ाब रखते हैं,
अंदर से खोखले, बाहर से चमकते हैं।
जो सच की बात करे, उससे खफ़ा रहते हैं,
और झूठ बोलने वालों को सर पे रखते हैं।
‘शकील’ हम भी अब दुनिया को समझने लगे,
जो साथ चलते हैं अक्सर वही बदलते हैं।
भरोसा किस पे करें, ये भी समझ नहीं आता,
यहाँ तो अपने ही हर मोड़ पे छलते हैं।
नज़र मिलाते हैं लेकिन नज़र चुराते हैं,
ये लोग दिल में अलग, लब पे कुछ बताते हैं।
मुस्कुराहटों के पीछे दर्द छुपाते हैं,
जो सबसे ज़्यादा हँसते हैं, वही तन्हा रह जाते हैं।
किसी का हाल पूछना भी अब रिवाज़ सा है,
वरना अपने दर्द से लोग कहाँ जुड़ पाते हैं।
‘शकील’ दिल की सच्चाई संभाल कर रखना,
यहाँ तो सच्चे लोग ही सबसे ज़्यादा सताए जाते हैं।
हमने सीखा है ख़ामोशी में भी जी लेना,
क्योंकि हर ज़ख़्म यहाँ लफ़्ज़ों में नहीं बताए जाते हैं।
पहचान के काग़ज़ तो सबके पास होते हैं,
मगर असली चेहरे अक्सर छुपाए जाते हैं।
नाम, पता, नंबर से कौन किसी को समझ पाया,
यहाँ तो दिल के रिश्ते ही भुलाए जाते हैं।
‘शकील’ हम तो बस सच्चाई के सहारे जीते हैं,
वरना लोग तो हर मोड़ पे रंग बदलते जाते हैं।
भीड़ में रहकर भी तन्हा सा महसूस होता है,
जब अपने ही नज़रें चुरा के निकल जाते हैं।
जिसे अपना समझा, वही दर्द दे गया हमको,
अब तो हर रिश्ते में डर के साये नज़र आते हैं।
ये दुनिया काग़ज़ी पहचान पे यक़ीन करती है,
दिल के साफ़ लोग अक्सर ठुकराए जाते हैं।
‘शकील’ अब तो दुआ है बस इतना सा रब से,
सच्चे लोग इस जहाँ में थोड़ा तो मुस्कुराते हैं।
जब टूट के बिखरते हैं, सब सहारे छूट जाते हैं,
तब ख़ुदा के दर पे ही आँसू सुकून पाते हैं। 🤲
जो दिल से याद करे अपने रब को तन्हाई में,
उसके अंधेरों में भी उजाले उतर आते हैं।
रसूल ﷺ की मुहब्बत दिल में जब उतर जाए,
बिगड़े हुए रास्ते भी खुद-ब-खुद सँवर जाते हैं। ❤️
उनकी सीरत को जो अपना आईना बना लेते हैं,
वो नफ़रतों के बीच भी मोहब्बत फैलाते हैं।
‘शकील’ बस यही दौलत काफ़ी है इस ज़िंदगी में,
जो दिल में इश्क़-ए-इलाही और नबी ﷺ बसाते हैं।
ना दौलत काम आती है, ना शोहरत साथ जाती है,
बस नेक अमल ही इंसान को ऊँचा उठाते हैं।
जब दिल पे ग़म का अँधेरा बहुत ही छा जाता है,
ख़ुदा का नाम ही सीने को रौशन कर जाता है।
जो टूट के भी सजदा-ए-रब में झुक जाते हैं,
वही लोग हर इम्तिहान में कामयाब कहलाते हैं।
रात की तन्हाई में जो आँसू बहाते हैं,
वो ही सुबह सुकून का पैग़ाम पाते हैं।
रसूल ﷺ की सीरत को जो दिल में उतार लेते हैं,
वो नफ़रतों के दरिया में भी मोहब्बत बहाते हैं।
जो नाम-ए-मुस्तफ़ा ﷺ से अपने दिल को सजाते हैं,
उनके हर दर्द पे रहमत के फूल बरसते जाते हैं।
गुनाहों में घिर कर भी जो तौबा कर लेते हैं,
ख़ुदा के दर से वो खाली कभी नहीं जाते हैं।
‘शकील’ ये दुनिया चाहे जितना भी आज़माती रहे,
रब वाले हर हाल में मुस्कुराते ही जाते हैं।
जिस दिल में इश्क़-ए-नबी ﷺ की शमा जलती है,
वहाँ अँधेरे भी आकर खुद ही लौट जाते हैं। ✨
ना ताज चाहिए, ना कोई बड़ी पहचान हमें,
बस उनके उम्मती हैं, यही फख्र दिलाते हैं।
‘शकील’ जब-जब दिल टूट कर बिखर जाता है,
दरूद पढ़ते ही दिल फिर से सँवर जाते हैं।
जिन्होंने पत्थरों में भी दुआएँ ही उठाईं,
वही रहमत बनके हर दिल पे उतर आते हैं।
ताइफ़ की गलियों में लहू बहता रहा मगर,
लब पे फिर भी उनकी बस दुआएँ ही आते हैं।
जो दुश्मनों को भी माफ़ कर देना सिखाते हैं,
वही तो असल में नबी कहलाते हैं।
भूखे रहकर भी जो औरों को खिलाते रहे,
ऐसे सादगी के सितारे कहाँ मिल पाते हैं।
‘शकील’ सीरत-ए-नबी ﷺ को जो दिल में बसा ले,
उसके हर अंदाज़ में करम नज़र आते हैं।
अंधेरों में भी जिसने उजालों का सबक दिया,
वो नाम-ए-मुस्तफ़ा ﷺ दिल को रोशन कर जाते हैं।
जिसने बदले में पत्थर नहीं, मोहब्बत दी,
ऐसे किरदार पे फ़रिश्ते भी नाज़ करते हैं।
ज़ुल्म सहकर भी जिसने सब्र का रास्ता चुना,
वो ही उम्मत को जीने का हुनर सिखाते हैं।
‘शकील’ जब भी सीरत को पढ़ते हैं आँख भर आती है,
क्योंकि उसमें दर्द भी हैं और मरहम भी मिल जाते हैं।
ना ताज, ना तख़्त, ना कोई दुनिया की चाहत थी,
उनकी सादगी पे आज भी दिल झुक जाते हैं।
जिसने हर रिश्ते को इंसानियत से जोड़ा,
वो ही तो रहमत बनकर जहाँ में आते हैं।
दरूद की सदा जब लबों पे सज जाती है,
तो ग़म के बादल भी खुद-ब-खुद हट जाते हैं।
‘शकील’ बस यही राह-ए-नजात है इस जहाँ में,
जो नबी ﷺ के नक़्श-ए-कदम पे चल जाते हैं।
Spelling Rule: -dge (Soft /j/ Sound) – Complete Notes
Spelling Rule: -dge (Soft /j/ Sound) – Complete Notes
Rule...
Use -dge at the end of a short one-syllable word when the final sound is /j/ (as in judge).
Roman English
Jab koi short (one-syllable) word ho aur uska aakhri sound /j/ ho, to uske end mein -dge likhte hain.
जब कोई छोटा (एक syllable वाला) शब्द हो और उसके आखिर में "ज" (/j/) की आवाज़ आए, तो उसके अंत में -dge लिखा जाता है।
Why do we use -dge?
The d keeps the vowel short before ge.
Roman English
d ka kaam vowel ko short rakhna hota hai.
हिंदी
d लगाने का मक़सद यह बताना है कि उससे पहले वाला स्वर छोटी आवाज़ (short vowel) में बोला जाएगा।
Formula (Very Easy)
Short vowel + /j/ sound = dge
Examples
Short Vowel Word
a badge
e edge
i bridge
o dodge
u judge
Common Examples
Word Meaning
badge बैज
edge किनारा
bridge पुल
judge न्यायाधीश
dodge बच निकलना
hedge बाड़
lodge सराय / ठहरने का स्थान
ridge पहाड़ी की धार
smudge धब्बा
trudge भारी कदमों से चलना
fudge मीठी मिठाई
budge ज़रा भी न हिलना
Example Sentences
English
The judge crossed the bridge.
Roman English
The judge crossed the bridge.
हिंदी
जज पुल पार कर गया।
English
Stand near the edge.
Roman English
Stand near the edge.
हिंदी
किनारे के पास खड़े हो जाइए।
English
He wore a school badge.
Roman English
He wore a school badge.
हिंदी
उसने स्कूल का बैज पहना।
Exception Rule
English
If the vowel is long or another consonant comes before the /j/ sound, we usually write -ge, not -dge.
Roman English
Agar vowel long ho ya /j/ se pehle doosra consonant ho, to aam taur par -ge likhte hain.
हिंदी
अगर स्वर लंबी आवाज़ (long vowel) वाला हो या ज की ध्वनि से पहले दूसरा व्यंजन हो, तो आमतौर पर -ge लिखा जाता है, -dge नहीं।
Examples of -ge
Word Why not -dge?
age long vowel
cage long vowel
page long vowel
huge long vowel
stage another consonant before ge
change another consonant before ge
charge another consonant before ge
large another consonant before ge
orange another consonant before ge
Compare
Short Vowel Long Vowel
badge cage
edge age
bridge huge
judge page
dodge stage
Easy Memory Trick
English
Short vowel → dge
Long vowel → ge
हिंदी
छोटी स्वर ध्वनि → dge
लंबी स्वर ध्वनि → ge
Final Exam Notes
Use -dge
Short vowel + /j/ sound
One-syllable words
Examples: badge, edge, bridge, judge, dodge, hedge, lodge, ridge, budge
Use -ge
Long vowel + /j/ sound
Or another consonant before ge
Examples: age, cage, page, huge, stage, charge, change, large
One-Line Rule
English:
Short vowel + /j/ = -dge
Roman English:
Short vowel + /j/ = -dge
हिंदी :
अगर शब्द छोटा हो और छोटी स्वर ध्वनि के बाद "ज" की आवाज़ आए, तो अंत में -dge लिखिए; लेकिन लंबी स्वर ध्वनि या दूसरे व्यंजन के बाद आम तौर पर -ge लिखिए।
Definition
English
The -dge spelling rule is used to spell the /j/ sound at the end of a short, one-syllable word after a short vowel.
Roman English
-dge rule ka istemal us waqt kiya jata hai jab kisi chhote (one-syllable) word ke end mein /j/ sound aaye aur usse pehle short vowel ho.
हिंदी
-dge नियम का इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी छोटे (एक syllable वाले) शब्द के आखिर में "ज" (/j/) की आवाज़ आए और उससे पहले छोटी स्वर ध्वनि (short vowel) हो।
English
Use -dge to spell the /j/ sound at the end of a short one-syllable word after a short vowel.
Roman English
Short vowel ke baad short word ke end mein /j/ sound ho to -dge likha jata hai.
जब किसी छोटे शब्द के अंत में "ज" की ध्वनि आए और उससे पहले छोटी स्वर ध्वनि हो, तो -dge लिखा जाता है।
Golden Rule
English
Short vowel + /j/ = -dge
हिंदी
छोटी स्वर ध्वनि + "ज" की आवाज़ = -dge
यह नियम अंग्रेज़ी की मानक स्पेलिंग पुस्तकों में स्वीकार किया जाता है और badge, edge, bridge, dodge, judge जैसे शब्दों पर बहुत अच्छी तरह लागू होता है।
Batch 2025 farewell day Shri Ashraf Ali Noori islamia higher secondary school Rarua
*
“Equal Numbers, Infinite Memories”
(बराबर गिनती, अनगिनत यादें)
यह शीर्षक हमने यूँ ही नहीं चुना है।
इसके पीछे हमारे स्कूल का एक इतिहास, एक रिकॉर्ड, और एक खूबसूरत बदलाव छुपा हुआ है।
हमारा यह स्कूल सन 1996 में स्थापित हुआ था।
तब से लेकर आज तक, हर साल बच्चे-बच्चियाँ पढ़ते आए हैं, आगे बढ़ते आए हैं।
लेकिन अगर हम सच कहें,
तो अब तक ज़्यादातर लड़कियाँ आर्ट्स या होम साइंस ही चुनती रही थीं।
मैथ्स जैसे विषय को चुनना उनके लिए आसान नहीं माना जाता था।
📌 मगर इस सत्र 2025–26 में इतिहास बदला है।
इस बार पहली बार ऐसा हुआ है कि
सबसे ज़्यादा लड़कियों ने मैथ्स विषय को चुना है।
यह हमारे स्कूल का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
आज लड़के और लड़कियाँ
बराबर संख्या में मैथ्स के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
यानी न कोई कम, न कोई ज़्यादा—
सब बराबर, सब साथ।
👉 इसी बराबरी को दर्शाने के लिए हमने “Equal Numbers” कहा।
और जो यादें इस सफ़र में बनी हैं—
क्लासरूम की हँसी,
टीचर्स की सीख,
गलतियों से सीखना,
और सपनों की उड़ान—
वो गिनी नहीं जा सकतीं।
👉 इसीलिए हमने कहा “ *Infinite Memories* ” — अनगिनत यादें।
मतला (Matla)
बराबर क़दमों से जो चलीं, वही राहें हैं
आज बेटियाँ भी मैथ्स में, ये नई निगाहें हैं
कभी जो डर थी किताबों से, सवालों से घिरी
आज उन्हीं हाथों में तालीम की चाहें हैं
सन उन्नीस सौ छियानवे से जो सपना था यहाँ
उस सपने की आज हक़ीक़त बनती पनाहें हैं
लड़के तो चलते रहे आगे, ये माना हमने
मगर आज बेटियों की भी मज़बूत गवाहें हैं
इक़्वल नंबर्स में छुपी है इक बड़ी सी बात
बराबरी से ही तो बनती कामयाब राहें हैं
यादें गिनी नहीं जातीं, ये हिसाब से बाहर
क्लासरूम की हँसी में ही अनगिनत दुआएँ हैं
*मक़्ता (Maqta)*
“ *शाकिल* ” ने दो हज़ार सत्रह से यही चाही दुआ
गाँव के बच्चों को मिले इल्म, यही तो निगाहें हैं
Daily Us Sentence with Image
कुछ कहा नहीं जा सकता।
(Kuchh kaha nahin ja sakta.)
You never know.
चलो घर चलें। (Chalo ghar chalen.)
Let's go home.
फ़िर मिलेंगे।
(Fir milenge.)
See you again.
इसे ले जाओ।
(Ise le jaao.)
Take it away.
चलो करते हैं।
(Chalo karte hain.)
Let's do it.
तुम समय पर आये हो। (Tum samay par aaye ho.)
You're on time.
चलो शुरू करें। (Chalo shuru
karen.)
Let's get started.
चलो बाहर खा के आते हैं। (Chalo baahar kha ke aate hain.)
Let's eat out.
चलो थोड़ी देर का ब्रेक लेते हैं। (Chalo thodi der ka break lete hain.)
Let's take a break.
चाय छान देना। (Chaay chhaan dena.)
Strain the tea.
चलो खरीदारी पर चलें। (Chalo kharidaari par chalen.)
Let's go shopping.
बात तो वही हुई। (Baat to vahi hui.)
It means the same.
चलो लंच करते हैं। (Chalo lunch karte hain.)
Let's grab lunch.
ठीक हो जाएँगी चीज़ें। (Theek ho jaayengi cheezen.)
Things will get better.
मुझे यकीन नहीं है। (Mujhe yakeen nahin hai.)
I'm not sure.
दरवाज़े बन्द ही रखना। (Darvaaze band hi rakhna.)
Keep the doors closed.
Friday, 3 July 2026
Spelling Rule: -dge (Soft /j/ Sound) – Complete Notes
Spelling Rule: -dge (Soft /j/ Sound) – Complete Notes
Rule...
Use -dge at the end of a short one-syllable word when the final sound is /j/ (as in judge).
Roman English
Jab koi short (one-syllable) word ho aur uska aakhri sound /j/ ho, to uske end mein -dge likhte hain.
जब कोई छोटा (एक syllable वाला) शब्द हो और उसके आखिर में "ज" (/j/) की आवाज़ आए, तो उसके अंत में -dge लिखा जाता है।
Why do we use -dge?
The d keeps the vowel short before ge.
Roman English
d ka kaam vowel ko short rakhna hota hai.
हिंदी
d लगाने का मक़सद यह बताना है कि उससे पहले वाला स्वर छोटी आवाज़ (short vowel) में बोला जाएगा।
Formula (Very Easy)
Short vowel + /j/ sound = dge
Examples
Short Vowel Word
a badge
e edge
i bridge
o dodge
u judge
Common Examples
Word Meaning
badge बैज
edge किनारा
bridge पुल
judge न्यायाधीश
dodge बच निकलना
hedge बाड़
lodge सराय / ठहरने का स्थान
ridge पहाड़ी की धार
smudge धब्बा
trudge भारी कदमों से चलना
fudge मीठी मिठाई
budge ज़रा भी न हिलना
Example Sentences
English
The judge crossed the bridge.
Roman English
The judge crossed the bridge.
हिंदी
जज पुल पार कर गया।
English
Stand near the edge.
Roman English
Stand near the edge.
हिंदी
किनारे के पास खड़े हो जाइए।
English
He wore a school badge.
Roman English
He wore a school badge.
हिंदी
उसने स्कूल का बैज पहना।
Exception Rule
English
If the vowel is long or another consonant comes before the /j/ sound, we usually write -ge, not -dge.
Roman English
Agar vowel long ho ya /j/ se pehle doosra consonant ho, to aam taur par -ge likhte hain.
हिंदी
अगर स्वर लंबी आवाज़ (long vowel) वाला हो या ज की ध्वनि से पहले दूसरा व्यंजन हो, तो आमतौर पर -ge लिखा जाता है, -dge नहीं।
Examples of -ge
Word Why not -dge?
age long vowel
cage long vowel
page long vowel
huge long vowel
stage another consonant before ge
change another consonant before ge
charge another consonant before ge
large another consonant before ge
orange another consonant before ge
Compare
Short Vowel Long Vowel
badge cage
edge age
bridge huge
judge page
dodge stage
Easy Memory Trick
English
Short vowel → dge
Long vowel → ge
हिंदी
छोटी स्वर ध्वनि → dge
लंबी स्वर ध्वनि → ge
Final Exam Notes
Use -dge
Short vowel + /j/ sound
One-syllable words
Examples: badge, edge, bridge, judge, dodge, hedge, lodge, ridge, budge
Use -ge
Long vowel + /j/ sound
Or another consonant before ge
Examples: age, cage, page, huge, stage, charge, change, large
One-Line Rule
English:
Short vowel + /j/ = -dge
Roman English:
Short vowel + /j/ = -dge
हिंदी :
अगर शब्द छोटा हो और छोटी स्वर ध्वनि के बाद "ज" की आवाज़ आए, तो अंत में -dge लिखिए; लेकिन लंबी स्वर ध्वनि या दूसरे व्यंजन के बाद आम तौर पर -ge लिखिए।
Definition
English
The -dge spelling rule is used to spell the /j/ sound at the end of a short, one-syllable word after a short vowel.
Roman English
-dge rule ka istemal us waqt kiya jata hai jab kisi chhote (one-syllable) word ke end mein /j/ sound aaye aur usse pehle short vowel ho.
हिंदी
-dge नियम का इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी छोटे (एक syllable वाले) शब्द के आखिर में "ज" (/j/) की आवाज़ आए और उससे पहले छोटी स्वर ध्वनि (short vowel) हो।
English
Use -dge to spell the /j/ sound at the end of a short one-syllable word after a short vowel.
Roman English
Short vowel ke baad short word ke end mein /j/ sound ho to -dge likha jata hai.
जब किसी छोटे शब्द के अंत में "ज" की ध्वनि आए और उससे पहले छोटी स्वर ध्वनि हो, तो -dge लिखा जाता है।
Golden Rule
English
Short vowel + /j/ = -dge
हिंदी
छोटी स्वर ध्वनि + "ज" की आवाज़ = -dge
यह नियम अंग्रेज़ी की मानक स्पेलिंग पुस्तकों में स्वीकार किया जाता है और badge, edge, bridge, dodge, judge जैसे शब्दों पर बहुत अच्छी तरह लागू होता है।
Spelling Rule: -cial and -tial (Very Easy Explanation)
Spelling Rule:
-cial and -tial (Very Easy Explanation)Rule 1: Use -cial after a vowel (a, e, i, o, u)
Many words end in -cial when the letter before it is a vowel.
Roman English:
Jab -cial se pehle vowel (a, e, i, o, u) ho, to aam taur par -cial likhte hain.
जब -cial से पहले स्वर (a, e, i, o, u) आता है, तो ज़्यादातर -cial लिखा जाता है।
Examples
Word Meaning
social समाज से संबंधित
special खास
beneficial लाभदायक
facial चेहरे से संबंधित
official आधिकारिक
crucial अत्यंत महत्वपूर्ण
commercial व्यावसायिक
artificial कृत्रिम
financial वित्तीय
provincial प्रांतीय
English: This is a special gift.
हिंदी: यह एक ख़ास तोहफ़ा है।
English: Exercise is beneficial for health.
हिंदी: कसरत सेहत के लिए फ़ायदेमंद है।
English: We are social animals.
हिंदी: इंसान समाज में रहने वाला प्राणी है।
.....
Rule 2: Use -tial after many consonants (especially n and r)
English:
Many words ending in -tial have a consonant before -tial, especially n or r.
Roman English:
Jab -tial se pehle consonant ho, khaaskar n ya r, to aksar -tial likhte hain.
जब -tial से पहले व्यंजन हो, ख़ासकर n या r, तो आम तौर पर -tial लिखा जाता है।
Examples
Word Meaning
essential आवश्यक
substantial पर्याप्त / महत्वपूर्ण
partial आंशिक
potential संभावित
influential प्रभावशाली
confidential गोपनीय
preferential प्राथमिकता वाला
differential अंतर संबंधी
sequential क्रमिक
residential आवासीय
Example Sentences
English: Water is essential for life.
हिंदी: पानी ज़िंदगी के लिए ज़रूरी है।
English: He gave only a partial answer.
हिंदी: उसने सिर्फ़ अधूरा जवाब दिया।
English: She has great potential.
हिंदी: उसमें बहुत क्षमता है।
⚠️ Important Note
This is a helpful spelling pattern, not a 100% rule. English has many exceptions because many words come from Latin and French. So the best way is to learn common words by practice.
English:
"Vowel loves C, Consonant often takes T."
Roman English:
"Vowel ke baad aksar C aata hai, aur consonant ke baad aksar T aata hai."
"स्वर के बाद ज़्यादातर C वाला (-cial) आता है, और व्यंजन के बाद अक्सर T वाला (-tial) आता है।"
याद रखें: यह सिर्फ़ याद रखने की ट्रिक है, हर शब्द पर लागू होने वाला सख्त नियम नहीं। इसलिए social, special, beneficial, essential, partial, substantial जैसे सामान्य शब्दों की स्पेलिंग अलग से भी याद करें।
...
cial और -tial का नियम 100% नहीं है। कई शब्द ऐसे हैं जो इस आसान ट्रिक का पालन नहीं करते क्योंकि वे Latin या French से आए हैं।
Important Exceptions (अपवाद)
1. Vowel होने के बावजूद -tial
ऐसे शब्द बहुत कम हैं, लेकिन ये नियम को तोड़ते हैं।
Word Meaning
initial प्रारंभिक
inertial जड़त्वीय (Physics)
quotiential (दुर्लभ) भागफल संबंधी
English: Initial means "at the beginning."
Roman English: Initial ka matlab shuru ka hota hai.
हिंदी: Initial का मतलब शुरुआत का होता है।
यहाँ i (vowel) होने के बाद भी -tial आया है।
...
Consonant होने के बावजूद -cial
ये भी नियम का अपवाद हैं।
Word Meaning
financial वित्तीय
provincial प्रांतीय
commercial व्यावसायिक
artificial कृत्रिम
official आधिकारिक
उदाहरण:
English: This is an official letter.
Roman English: This is an official letter.
हिंदी: यह एक आधिकारिक पत्र है।
सबसे महत्वपूर्ण Exam Exceptions
इन शब्दों की स्पेलिंग अक्सर परीक्षाओं में पूछी जाती है:
initial❌ (vowel के बाद भी -tial)
["other","financial","English word"]❌
entity["other","official","English word"]❌
other","commercial","English word"]❌
artificial
Remember: यह 100% नियम नहीं, बल्कि एक spelling pattern है। परीक्षा के लिए सबसे ज़रूरी बात है कि common words की spelling याद रखें।
Thursday, 18 June 2026
ढरियहार वाले मियां चंदादरगाह की तामीर में सामान की शक्ल में मिलने वाले तआवुन की तफ्सील
ढरियहार वाले मियां चंदा
दरगाह की तामीर में सामान की शक्ल में मिलने वाले तआवुन की तफ्सील
🔹 समीम खान ( मजीद खान) — 1000 ईंटें पेश की हैं।
🔹 नजीम खान — 1 बोरी सीमेंट का तआवुन किया है।
🔹 समा ब्रिक भट्ठा(मोहम्मद इश्तियाक अंसारी+रियाजुद्दीन प्रधान और बाकी पार्टनर ) — 1000 ईंटें दी हैं।
🔹 इमदाद ( भट्ठा )— 500 ईंटों का तआवुन किया है।
🔹 इंडियन ब्रिक भट्ठा (मालिक: पप्पू+ इश्तियाक others ) — 500 ईंटें दी हैं।
🔹 अजहरी ब्रिक भट्ठा (मालिक: आमीन ) — 300 ईंटें दी हैं।
🔹 डायमंड साबरी ब्रिक (मालिक :मोइनुद्दीन अंसारी ) + नवी शेर(500 ईंटें ) — 1500 ईंटें दी हैं, साथ ही रोड़ा (गिट्टी snag brick) का भी तआवुन किया है।
अल्हम्दुलिल्लाह, इन तमाम हज़रात ने दरगाह की तामीर में ईंटों, सीमेंट और दूसरे जरूरी सामान के ज़रिये अपना कीमती हिस्सा डाला है। अल्लाह तआला सबके माल व जान में बरकत अता फरमाए, उनकी इस नेक खिदमत को अपनी बारगाह में कबूल फरमाए और इसका बेहतरीन अज्र अता करे। आमीन।
📌 कुल ईंटें हासिल हुईं: 5300 ईंटें
📌 दीगर सामान: 1 बोरी सीमेंट और रोड़ा (गिट्टी)
📌 इसके अलावा चंदे की रकम से लगभग ₹15,000 का सरिया, मौरंग, पथरिया और दूसरा तामीरी मटेरियल भी खरीदा गया है, जो दरगाह की तामीर में इस्तेमाल हो रहा है।
ढरियहार वाले मियां चंदा टोटल चंदा =
चंदा कीतारीख 08/06/2026
₹ 500 मरहूम हाजी छोटा बक्श अंसारी
₹ 100 तौसीफ वालिद का नाम नन्नाकु
₹ 20 + ₹300 अकील वालिद का नाम सूबेदार 12/06/2026
₹ 50 जहूर खान
₹ 50 + ₹500 लियाकत खान वालिद का नाम रिफ़ायत हुसैन खान( 12/06/2026)
₹ 20 जहीर खान
₹ 50 रिजवान वालिद का नाम लल्लू
₹ 60 शमशाद वालिद का नाम इस्ली
₹ 500 राजी़द खान वालिद का नाम मजीद खान
₹ 100 इकबाल वालिद का नाम लल्लू खान
₹ 100 पुत्तन खान वालिद का नाम सरताज खान
₹ 500 गौहर अली सैयद वालिद का नाम सैयद मोहम्मद
₹ 100 राजेंद्र राठौर (तेली)
₹ 51 रामपाल राठौर (तेली)
₹ 51 झब्बू राठौर (तेली)
₹ 50 सुनील कुमार
₹ 100 इरफान खान वालिद का नाम लल्लू
₹ 100 इरफान खान वालिद का नाम करमतुल्ला खान
₹ 100 रफ़्फन खान “ करमतुल्ला खान
₹ 200 जब्बास खान वालिद का नाम मुंशी खान
₹ 250 मेहनूश खान वालिद का नाम नन्हे खान
₹ 500 समीम खान वालिद का नाम मजीद खान
₹ 50 राशिद खान वालिद का नाम नत्थू खान
₹ 100 मेहताज वालिद का नाम बन्ने खान
₹ 200 इंतखार खान वालिद का नाम मुख्तियार
₹ 50 फिदा हुसैन खान
₹ 100 अनवर खान
₹ 50 नवाब खान वालिद का नाम इमदाद खान
₹ 50 इश्क़ खान वालिद का नाम कल्लू
₹ 50 + ₹500 रिहान खान वालिद का नाम रहीस खान 12/06/ 2026
₹ 90 अख्तियार खान
₹ 20 फूल बाबू वालिद का नाम छुट्टन खान
₹ 100 हाशिम खान वालिद का नाम इकरार खान
₹ 50 सलीम खान
₹100 अयूब खान वालिद का नाम गुलशेर खान
₹ 100 अकरम खान बालिका नाम गुलशेर खान
₹ 50 यूनुस खान वालिद का नाम कल्लू खान
₹ 50 नदीम खान ( यूनुस खान के घर मेहमानों ने दिए)
₹ 50 लाइक खान ( यूनुस खान के घर मेहमानों ने दिए)
₹50 यासीन खान
₹100 + ₹ 200 रियासत खान वालिद का नाम रफत खान 12/06/2026
₹ 100 डॉक्टर निज़ाकत खान
₹ 100 जानू खान वालिद का नाम अनवर खान
₹ 50 मुन्नी खान वाइफ ऑफ अनवर खान
₹100 अनीश मिस्त्री वालिद का नाम सल्लू खान
₹ 100 तोहिद खान वालिद का नाम बुद्ध खान
₹ 100 मजले खान वालिद का नाम इसरार खान
₹ 100 मोहम्मद मियां
₹ 200 राफुल्ल खान ( दरगाह के खिदमतकार)
₹ 100 + ₹ 50 कौसर खान 12/06/2026
₹ 30 यासीन खान
₹ 100 लल्ला खान
₹ 200 रिहान खान (लल्ला खान के दामाद जी ने दिए)
₹ 50 मियां खान
₹100 मोहसिन खान वालिद का नाम मियां खान
₹ 50 चांद मियां खान वालिद का नाम बाला खान
₹100 कप्तान खान
₹50 आरिफ खान
₹100 बाबू खान
₹120 जाबिर खान
₹500 मसरूल लाला (बेटे का नाम तसलीम खान)
₹ 50 एजाद खान वालिद का नाम अशफाक खान
₹ 20 वालिद ने नाम नहीं बताया लेकिन बच्चे का नाम फैजान खान
₹20 फूल बाबू वालिद का नाम लाल खान
₹20 लाल खान
₹ 20 मिस्कन्ना इदरीसी
₹ 100 करारउद्दीन अंसारी
₹ 100 अजहरुद्दीन अंसारी वालिद का नाम खन्ना
₹ 100 एजाद हुसैन शेख वालिद का नाम नन्हे
₹ 100 दिलशाद शेख
₹ 500 सरफउद्दीन अंसारी उर्फ कोटेदार
₹ 100 रईसउद्दीन अंसारी
₹ 100 कुतुबउद्दीनअंसारी
₹ 100 नाम बताया नहीं अंसारी में एक बूढी औरत ने दिए (खन्ना के घर के पास रहती है)
₹ 100 बशीर हसन इदरीसी
₹ 50 कदीर खान
₹ 11 चंदा शेख (उन्होंने अपनी खुशी से दिए बाकी उनके बच्चे देंगे)
₹100 आरिफ अंसारी वालिद नाम मेहंदी हसन
₹ 30 इकरार अंसारी
₹50 जान मोहम्मद
₹ 20 मोहम्मद आसिफ अंसारी
₹ 40 अनिसुद्दीन अंसारी
₹50 इसामउद्दीन अंसारी
₹10 (ईदउल हसन की बीवी ने दिए )
₹ 50 गुड्डू अंसारी वालिद का नाम नत्थू अंसारी
₹ 100 आशिक अली अंसारी
₹ 50 इकबाल अंसारी
₹ 100 इस्हाक़ अली अंसारी
₹ 50 नूर हसन अंसारी खै़रे वाले
₹ 200+500 उम्रउद्दीन अंसारी (बेटे का नाम कलीमुद्दीन) 12/06/2026
₹ 200 शहजउद्दीन अंसारी वालिद का नाम खन्ना अंसारी
₹ 50 शकील अहमद वालिद का नाम नसीर अहमद
₹ 50 डॉ अशफाक अंसारी
₹ 20 राशिद इदरीसी
₹ 50 मुन्नी इदरीसी (छुट्टू की बहन)
₹ 50 गुलअफशा अंसारी (रियाजुद्दीन प्रधान की बेटी)
₹ 50 हनीफ अंसारी वालिद का नाम नत्थू
₹ 51 अंसार अंसारी
₹ 100 कमलेश गुप्ता
₹ 100 अब्दुल बहार अंसारी
₹100 + 200 बन्ने खान 12/06/2026
₹100 जाहिद अली उर्फ बड़े लल्ला (तौफीक़ अंसारी)
₹500 नूरुद्दीन अंसारी ( मरहूम रहीसुद्दीन)
₹100 नसरुल्लाह इदरीसी और वालिद का नाम बुद्ध
₹100 मोहम्मद सदीक इदरीसी
₹ 200 मोहम्मद ज़ाकिर बिलसंडा
₹100 जमील हसन इदरीसी वालिद का नाम मसीतुल्लाह मास्टर
₹1000 असगर खान (बेटे क्या नाम गुड्डू )
₹ 500 राणा भट्टे वाले ने रुपए दिए
₹500 इकरार इदरीसी
₹500 कल्लू इदरीसी
₹500 कलीमउद्दीन अंसारी ( हाजी छोटे बक्श)
₹1000 सोनू मिश्रा और वालिद का नाम बूनी तिहार का प्रधान
₹500 गुलजार सिंह (पंजाबी)
₹200 लखबीर सिंह (पंजाबी)
₹200 सुखविंदर सिंह (पंजाबी)
₹200 नत्थू खैरे वाले
अल्हम्दुलिल्लाह, दरगाह के पहले से मौजूद पैसों में से ₹10000 ( आबिद खान ) भाई ने जमा करा दिए हैं। इसके अलावा दरगाह का कुछ और पुराना पैसा भी बाकी है, जो अभी तक वसूल नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि पहले का कुल बकाया लगभग ₹14000 से ज़्यादा है। फिलहाल सिर्फ ₹10000 प्राप्त हुए हैं, जबकि बाकी रकम मुख्तलिफ लोगों के पास है, जो इंशाअल्लाह मिलने पर हिसाब में शामिल कर ली जाएगी।
Date 12 june 2026
₹200 सलीम इदरीसी नातेदार
₹ 300 गुड्डू इदरीसी नातेदार
₹200 अकरम हुसैन
₹1000 रवि सिंह झाला (लवदीप सिंह के माध्यम से हासिल हुए रवि के नातेदार)
₹3000 सीमेंट के लिए दिए है ।(दोस्त ने )
₹500 गुड्डू खान
₹200 नसीम खान
₹100 अब्दुल सत्तार अंसारी
₹ 200 सलीम हुसैन
₹ 50 उस्मान खान
₹200 जुल्फिकार खान
₹100 नाजिम खान
₹100 महीश खान मिस्त्री
₹ 100 एहसान खान मिस्त्री
₹200 आरिफ खान
₹1100 पान सिंह प्रधान पंजाबी झाला डिमरई
₹ 100 गोपी सिंह पंजाबी झाला
₹ 1000 बलकार सिंह पंजाबी झाला
₹ 200 दिलबाग सिंह
₹ 2600 दरगाह के पहले के पैसे मिले हैं फैजान अंसारी उर्फ गुड्डू के माध्यम से मिले।
₹500 गुड़िया इदरीसी (नसरुल्लाह की बेटी)
₹700 साजिद अली अंसारी वालिद का नाम आबिद अली अंसारी
₹300 सोनो अंसारी वालिद का नाम आबिद अली अंसारी
₹500 शेर खान वालिद का नाम छोटे खान
₹100 दीन मोहम्मद अंसारी
गोपाल मास्टर ने एक सीमेंट की बोरी दी है।
₹500 फैयाज हुसैन खान
₹200 शमशाद शेख
₹1100 नदीम मुर रहमान वालिद नाम अतिकुर रहमान
दरगाह के पुराने ₹5000 आबिद ख़ान के पास अमानत के तौर पर जमा थे, जिन्हें उन्होंने दरगाह के लिए वापस दे दिया है।
दरगाह की तामीर में मौरंग, सरिया और बजरी की ख़रीद के लिए ₹5000 कलीमुद्दीन अंसारी वालिद मरहूम हाजी छोटा बक्श अंसारी ने दिए थे।
₹ 2000 आबिद खान
₹200 शकील मंसूरी मिस्त्री बरेली वाले
…
दरगाह की अमानत/रकम का विवरण
🔹 ₹2600 फैज़ान अंसारी साहब के पास दरगाह की अमानत के तौर पर जमा थे, जिन्हें उन्होंने वापस अदा कर दिया है।
🔹 ₹10000 आबिद ख़ान साहब के पास दरगाह की अमानत के तौर पर जमा थे, जिन्हें उन्होंने भी वापस अदा कर दिया है।
🔹 वसीम उर्फ़ मुल्ला जी के ज़िम्मे ₹2000 दरगाह की रकम बाकी है, जो अभी तक अदा नहीं की गई है।
नोट: जिन लोगों के पास दरगाह की कुल ₹12,600 अमानत/रकम थी, उन्होंने वह रकम वापस कर दी है। केवल वसीम उर्फ़ मुल्ला जी के ज़िम्मे ₹2000 बाकी है, जो अभी प्राप्त होना शेष है।
अल्हम्दुलिल्लाह, दरगाह की तामीर में जिन-जिन हज़रात ने नक़द चंदा, ईंटें, सीमेंट, रोड़ा (गिट्टी), सरिया, मौरंग, बजरी या किसी भी दूसरी शक्ल में तआवुन किया है, उनका नाम इस हिसाब-किताब की लिस्ट में दर्ज है।
जिन लोगों ने किसी भी प्रकार का चंदा, रकम या तामीरी सामान नहीं दिया है, उनका नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है।
महत्वपूर्ण नोट
इस लिस्ट में सिर्फ उन्हीं लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं जिन्होंने दरगाह की तामीर के लिए नक़द चंदा दिया है या ईंट, सीमेंट, रोड़ा (गिट्टी), सरिया, मौरंग, बजरी अथवा किसी अन्य तामीरी सामान की शक्ल में तआवुन किया है।
जिन लोगों ने न तो कोई चंदा दिया है और न ही किसी प्रकार का तामीरी सामान दिया है, उनका नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है।
यह पूरा हिसाब-किताब और तफ़सील शकीलुद्दीन अंसारी के ज़रिए दर्ज की गई है।
इस लिस्ट में सिर्फ उन्हीं लोगों के नाम शामिल किए गए हैं जिन्होंने दरगाह की तामीर के लिए किसी न किसी शक्ल में तआवुन किया है, चाहे वह नक़द चंदे की सूरत में हो, ईंट, सीमेंट, रोड़ा (गिट्टी), सरिया, मौरंग, बजरी या किसी अन्य तामीरी सामान की शक्ल में हो।
चंदे की रकम कम हो या ज़्यादा, उससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। इस लिस्ट में हर उस शख्स का नाम दर्ज किया गया है जिसने अपनी हैसियत के मुताबिक़ दरगाह के लिए किसी भी रूप में मदद की है।
जिन लोगों ने दरगाह की तामीर के लिए किसी भी प्रकार का चंदा, सामान या तआवुन नहीं किया है, उनका नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है।
सामान जमा होने का विवरण
दरगाह की तामीर के लिए खरीदा गया 4 पीस सरिया (पूरा सेट) तथा पिलर/कलम के रिंग (कुल वजन 11 किलो 700 ग्राम) फिलहाल विकास गुप्ता की दुकान पर सुरक्षित रूप से जमा करा दिए गए हैं।
सरिया का अंतिम वजन अभी पुष्टि (कन्फर्म) होना बाकी है। जब भी दरगाह की तामीर का काम दोबारा शुरू होगा, यह सामान विकास गुप्ता की दुकान से वापस प्राप्त कर लिया जाएगा।
सामान दुकान पर अमानत के तौर पर रखा गया है और आवश्यकता पड़ने पर उसी वजन और हिसाब के अनुसार दरगाह की तामीर में इस्तेमाल किया जाएगा।
दरगाह की तामीर हेतु जमा मटेरियल का विवरण
🔹 सरिया — 45.150 किलोग्राम (वजन अनुसार)
🔹 कलम के रिंग — 11.700 किलोग्राम (वजन अनुसार)
उपरोक्त दोनों मटेरियल दरगाह/मजार की तामीर के लिए सुरक्षित रूप से विकास गुप्ता जी की दुकान पर जमा कर दिए गए हैं।
जब भी दरगाह की तामीर या कोई निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा, तब यही मटेरियल अपने जमा किए गए वजन के अनुसार वापस प्राप्त कर लिया जाएगा।
अर्थात, 45.150 किलोग्राम सरिया तथा 11.700 किलोग्राम कलम के रिंग, कुल जमा वजन के बराबर मटेरियल भविष्य में दरगाह के कार्य हेतु लिया जाएगा।
नोट: यह मटेरियल अमानत के तौर पर जमा है और दरगाह की तामीर शुरू होने पर उसी वजन के अनुसार वापस लिया जाएगा।
दरगाह का खर्चा दरगाह का खर्चा हिसाबदिनांक: 09 जून 2026 से 17 जून 2026 तकदरगाह का खर्चा
हज़रत सैयद शैख़ सलाहुद्दीन रहमतुल्लाह अलैह
उर्फ़ डढ़िया वाले मियां
दरगाह का खर्चा हिसाब
दिनांक: 09 जून 2026 से 17 जून 2026 तक
दरगाह का खर्चा
साजिद ने रेता की ढुलाई के पैसे नहीं लिए
9 जून को ढाई सौ रुपए की मिठाई लिए दरगाह के लिए
9 जून को (₹120 का पेट्रोल भरवाया सिंगापुर में कर्मचारियों के लिए लाने के लिए मुल्लाजी की मोटरसाइकिल में)
3 तीन मजदूर चले हैं उनके ₹900 देने हैं उनके ₹900 दे दिए
…..
मजदूर सैलरी
साईंम =300
मुसीम =300
शोएब =150(हाफ मजदूरी करी)
हनीफ=300
Total=1050
10 जून 2026
₹1000 अबरार ट्रैक्टर के ढुलाई के लिए
₹30 मजदूर को गुटखा खाने के लिए
₹100 का मोटरसाइकिल में पेट्रोल₹ 100 ईट भरवाने वालों का मजदूरी लोगों ने ₹100 का खाना खाया।
₹ 100 ट्राली ट्रैक्टर की मेजरमेंट यानी भजन के कांटे के रुपए
बरेली से शकील मिस्त्री आए हैं₹200 का पेट्रोल और उनके खान के लिए ₹640 जितने दिन भी रुकेंगे
₹ 200 मजदूरी ढुलाई के लिए
₹15000 चंदा में से दिए और ₹5000 अपनी तरफ से मिलाए है मौरंग और बजरी के और सरिया के रुपए जमा किए हैं।
4 मी ट्रिपाल₹400 का₹100 का पेट्रोल गाड़ी में
………….
11 june 2026
₹500 अबरार ट्रैक्टर के लिए तेल पैसे दिए हैं
₹120 का पेट्रोल
मजदूर सैलरी
शकील मंसूरीमिस्त्री =500 +500 ( वसीम के माध्यम से)=1000 total
मुसीम =300
शोएब =300
12 june 2026
₹120 मुल्लाजी की गाड़ी में पेट्रोल डलवाया चंदा करने के लिए
13 June 2026
₹40 आरी के 4 ब्लड खरीदे हैं l
₹120 +20 मोटरसाइकिल में पेट्रोल + धागा
₹ 1000 मिस्त्री को पेमेंट किया है
₹ 160 कोलम (पीलर )बांधने के लिए बान( बान रस्सी )
है ।
₹ 4000 मौरंग बजरी की दुकान पर ₹4000 जमा किए हैं।
14/06/2026 यही
पिलर के रिंग + और तार और प्लस ब्रश =
रिंग बनवाने का चार्ज =116
24.150X 75=1811
1 .250 X 110किलो तार =137
एक ब्रश कर वाला =30
टोटल रुपया=2094 payment
₹250 वसीम इदरीसी मजदूरी के
₹104 रुपए पेट्रोल
₹600 समीउद्दीन 2 दिन की मजदूरी के पैसे
15/06/2026
₹ 2590 सीमेंट की 7 बोरी
₹100 सीमेंट ट्रांसपोर्ट
₹ 20 मिस्त्री के लिए दो साबुन एक नहाने वाला एक कपड़े धोने वाला।
₹ 1000 आसिफ अंसारी मिस्त्री की मजदूरी
₹300 समीउद्दीन 1 दिन की मजदूरी के पैसे
₹100 वसीम इदरीसी उर्फ मुल्लाजी को पैसे दिए हैं
₹90 बच्चों को पैसे दिए चीज खाने के लिए उनसे ईट उठाने का काम करवाया।
16/06/2026
₹1500 शकील मिस्त्री मजदूरी
₹ 1520 चार बोरी सीमेंट के लिए और थोड़े पैसे पिछले रिमेनिंग के लिए।
₹100 कलम के फ्रेम सपोर्टर का चार्ज (इकबाल टाल वाले)
₹ 124 बच्चों को पैसे दिए चीज खाने के लिए उनसे ईट उठाने का काम करवाया।
₹800 आसिफ भाई को आज की दिहाड़ी और बाकी पिछली बचे हुए पैसे ।
₹300 समीउद्दीन 1 दिन की मजदूरी के पैसे
₹120 पेट्रोल मोटरसाइकिल के लिए ।
17/06/2026
₹300 आसिफ अंसारी मिस्त्री हाफ काम
₹300 समीउद्दीन 1 दिन की मजदूरी के पैसे
₹500 शकील मिस्त्री मंसूरी हाफ मजदूरी ट्रांसपोर्ट का चार्ज।
₹300 वसीम इदरीसी 1 दिन की मजदूरी के पैसे
₹60 खुला हुआ सीमेंट 6 किलो
₹ 123 बच्चों को पैसे दिए चीज खाने के लिए उनसे ईट उठाने का काम करवाया।
₹ 130 खर्च का पीडीएफ हार्ड कॉपी में प्रिंट आउट के
₹120 का पेट्रोल मुल्लाजी की मोटरसाइकिल में डलवाया
दरगाह में जितना भी चंदा प्राप्त हुआ था, उसमें से आवश्यक खर्च करने के बाद जो भी रकम बची, वह पूरी रकम वसीम इदरीसी उर्फ़ मुल्ला जी के सुपुर्द कर दी गई है।
बची हुई रकम का विवरण
दरगाह की तामीर में जितना भी खर्च हुआ, उसके बाद ₹900 रकम बची थी।
यह ₹900 वसीम इदरीसी उर्फ़ मुल्ला जी को अमानत के तौर पर सुरक्षित रखने के लिए सौंप दिए गए हैं।
जब भी दरगाह की तामीर का काम दोबारा शुरू होगा, यह ₹900 वापस लेकर दरगाह के काम में खर्च किए जाएंगे।
यह रकम दरगाह की बची हुई अमानत है और भविष्य में तामीरी काम के लिए महफ़ूज़ रखी गई है।
17 जून 2026
Tuesday, 21 April 2026
बर्ड मीनिंग
👉 “दोमुंहा” (दो मुँह वाला)
मतलब: जो अलग-अलग लोगों के सामने अलग-अलग बातें करे।
👉 “दोगला”
मतलब: जिसकी बातें और व्यवहार एक जैसे न हों, दोनों तरफ अलग-अलग खेल खेले।
👉 “मुनाफ़िक़” (मुनाफिक)
मतलब: ऊपर से कुछ और, अंदर से कुछ और — हर जगह खुद को सही दिखाने वाला।
👉 “दोहरी सोच वाला” / “दोहरे चरित्र वाला”
मतलब: एक ही समय में दो तरफ अलग-अलग बातें करना।
👉 “पाखंडी”
मतलब: दिखावा करने वाला, सच्चाई छुपाकर खुद को सही साबित करने वाला।
सीधी भाषा में समझो:
जो इंसान दोनों तरफ अलग-अलग बोलकर खुद को हर हाल में सही दिखाना चाहता है — उसे दोमुंहा, दोगला या मुनाफिक कहा जाता है।
1️⃣ जो इंसान जहाँ फायदा देखे, तुरंत उसी तरफ हो जाए:
👉 “मौकापरस्त”
मतलब: जो अपने फायदे के हिसाब से पक्ष बदलता रहे।
2️⃣ जो अपना काम निकालकर बाद में धोखा दे:
👉 “धोखेबाज़”
👉 “मतलबी”
3️⃣ जो अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करे और बाद में छोड़ दे:
👉 “मतलबी”
👉 “खुदगर्ज”
4️⃣ जो पहले साथ खुश रहे और फिर छोड़ दे:
👉 “बेवफ़ा”
👉 “वादा तोड़ने वाला” (बदअहद)
एक लाइन में समझो:
फायदा देखकर बदलने वाला → मौकापरस्त
काम निकालकर धोखा देने वाला → धोखेबाज़ / मतलबी
इस्तेमाल करके छोड़ देने वाला → खुदगर्ज / मतलबी
साथ छोड़ देने वाला → बेवफ़ा
👉 “पक्षपाती”
👉 “नाइंसाफ़” (न्याय न करने वाला)
2️⃣ जो जिधर फायदा दिखे उधर हो जाए:
👉 “मौकापरस्त”
👉 “मतलबी”
3️⃣ जो हर हाल में खुद को सही साबित करना चाहता है (चाहे गलत हो):
👉 “जिद्दी”
👉 “अहंकारी” (घमंडी)
4️⃣ जो अपनी इज्जत बचाने के लिए बड़ों का इस्तेमाल करे, चाहे उनकी इज्जत खराब हो जाए:
👉 “खुदगर्ज”
👉 “बेजिम्मेदार”
👉 “एहसान फरामोश” (जिसने बड़ों का मान नहीं रखा)
5️⃣ जो दूसरों को सिर्फ अपना स्टेटस दिखाने के लिए इस्तेमाल करे:
👉 “दिखावटी”
👉 “रियाकार” (पाखंडी)
1️⃣ जो छोटे को गिराकर खुद को बड़ा दिखाए:
👉 “नीच मानसिकता वाला”
👉 “घटिया सोच वाला”
👉 “कमज़ोर चरित्र वाला”
2️⃣ जो दूसरों को नीचा दिखाकर अपनी इज्जत बनाना चाहता है:
👉 “अहंकारी” (घमंडी)
👉 “खुदगर्ज”
👉 “दिखावटी”
3️⃣ जो रिश्तेदारी में छोटे को दबाकर खुद को इज्जतदार दिखाए:
👉 “पाखंडी” (रियाकार)
👉 “मुनाफिक” (बाहर कुछ, अंदर कुछ और)
4️⃣ जो थोड़ा सा काम करके या छोटा एहसान करके बार-बार लोगों को बताए:
👉 “एहसान जताने वाला”
👉 “शो-ऑफ करने वाला”
👉 “डींग मारने वाला”
5️⃣ जो दूसरों को गिराकर अपनी तारीफ करवाना चाहता है:
👉 “स्वार्थी”
👉 “मतलबी”
सीधी और कड़ी बात:
ऐसा इंसान असल में खुद को बड़ा नहीं बनाता,
बल्कि अपनी कमज़ोरी छुपाने के लिए दूसरों को छोटा करता है।
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