Sunday, 5 July 2026

रिज़्क़ और कमाई में फ़र्क़ क्या है?

रिज़्क़ और कमाई में फ़र्क़ क्या है?

👉 कमाई (Profit)
वो है जो इंसान अपने हाथों की मेहनत से, कारोबार से या नौकरी से हासिल करता है।
जैसे कोई दुकानदार सौदा बेचकर मुनाफ़ा लेता है, या कोई मज़दूर अपनी मज़दूरी पाता है —
यह सब उसकी ज़ाहिरी कमाई है।

👉 रिज़्क़ (Sustenance)
रिज़्क़ वो हिस्सा है उस कमाई में से जो वाक़ई तुम्हारे काम आए,
जो अल्लाह तआ़ला ने तुम्हारे नसीब में लिखा है —
वो चाहे थोड़ा हो या ज़्यादा, वही असली रिज़्क़ है।
मिसाल से समझिए

फ़र्ज़ कीजिए किसी आदमी ने पूरे दिन मेहनत की और 1000 रुपये कमाए।
लेकिन उसमें से 200 रुपये उसने ज़रूरतमंद को दे दिए,
300 रुपये से घर चलाया,
और बाकी में से जो कुछ उसके काम आया — वही उसका रिज़्क़ था।
बाकी जो बर्बाद हो गया, चोरी हो गया या न काम आया — वो रिज़्क़ नहीं था।


असल बात क्या है?

रोज़ी कमाना हमारी कोशिश है,
मगर रिज़्क़ मिलना अल्लाह की मर्ज़ी और तक़दीर है।
इसलिए जो हिस्सा हमें वाक़ई नसीब होता है — वही हमारा रिज़्क़े हलाल कहलाता है।
Profit यानी मुनाफ़ा तो कई बार हराम तरीक़े से भी हो सकता है,
मगर रिज़्क़ सिर्फ़ हलाल रास्ते से आता है।


नतीजा

तो हाँ —
जो इंसान कमाता है, उसका profit उसका रिज़्क़ नहीं होता,
बल्कि उस profit का वही हिस्सा उसका रिज़्क़ होता है जो उसके काम आए और बरकत वाला हो।
बाकी जो सिर्फ़ गिनती में है, वो आज है और कल चला जाएगा।



क्या “रिज़्क़ (رزق)” कमाई या प्रॉफिट का हिस्सा होता है?

🌿 जवाब:

जी हाँ — रिज़्क़ कमाई (Profit) का हिस्सा तो होता है,
लेकिन पूरा Profit रिज़्क़ नहीं होता।

यानि —
जितनी भी तुम कमाई करते हो, उसमें से जो हिस्सा अल्लाह ने तुम्हारे नसीब में लिखा है,
जो तुम्हारे काम आता है, जो बरकत वाला है, जो हलाल है —
वही असली रिज़्क़ है।
हर कमाई में से रिज़्क़ एक हिस्सा होता है।
✅ Profit कमाई है, लेकिन हर profit रिज़्क़ नहीं होता।
✅ रिज़्क़ वही है जो हलाल हो, बरकत वाला हो, और काम में आए।



मेहनत से जो कमाए, वो कमाई नहीं होती,
बरकत जो अल्लाह दे, वही कमाई होती।

रिज़्क़ तो नसीब से मिलता है बंदे को,
वरना कई मेहनती भी खाली जाई होती। 

हर एक लुक़्मे में रहमत की निशानी है,
न गिनती से, न तदबीर से, ये कहानी है।

मेहनत में है बरकत, यही असल कमाई,
हर लुक़्मा है रहमत, अगर हो सफ़ाई।
मुनाफ़ा वही जो हलाल राह से आए,
वरना दौलत भी रूह की रुसवाई।
मतलब:
कमाई सिर्फ़ नोट नहीं — एक नेमत है।
बरकत उसी में है जो हलाल और सच्ची मेहनत से आए।
अगर नीयत साफ़ हो, तो छोटा मुनाफ़ा भी रिज़्क़-ए-ख़ुदा बन जाता है,
और अगर नीयत में खोट हो, तो बड़ी दौलत भी बे-बरकत रहती है।

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Shakil Ansari