तू है मलिक, तू है क़ुद्दूस, तू है सलाम,
हर सांस में तेरा ही है मुक़ाम।
तू है ग़फ़्फ़ार, तू है सत्तार,
गुनाहों का है तू परदा-दार।
तू अल्लाह, तू है वाहिद, तू ही सुमद,
तेरे नाम से जुड़ता है हर अहमद।
तू है बासित, तू है राफ़े,
मुश्किलों को कर दे आसान सफ़े।
तू करीम, तू रहीम, तू अल-हक़,
तेरी बंदगी में है हर दिल की चहक।
तू है नूर, तू है वहीद,
तेरे फ़ज़्ल से ही है ये सारी उम्मीद।
तू है अल-रहमान, तू अल-मालिक,
तेरी रहमतों का न हो कोई मालिक।
तू अल-रज़्ज़ाक, तू अल-ख़ालिक,
तेरे ही करम से हर दिल है मुसालिक।
........
**नज़्म: "तू ही सबका सहारा"**
*(तर्ज़: नात-ए-रसूल के तरन्नुम में)*
**शेर 1:**
तू है वदूद, तू है वली,
हर सांस में बस तेरा ही जली।
तू है ग़फार, तू है सत्तार,
तेरे करम से हर दिल गुलज़ार।
**तरन्नुम:**
(तू ही तो है, ओ मेरे मौला,
तेरे बिना कोई भी ना सहारा।
तेरे बिना कोई भी ना सहारा।)
**शेर 2:**
तू है नसीर, तू है बसीर,
हर राह में तेरा ही ज़मीर।
तू है मलिक, तू है क़ुद्दूस,
तेरे फ़ज़ल से हर ग़म दूर।
**तरन्नुम:**
(तेरी रहमत की बारिश हो,
हर दिल में तेरा ही नूर हो।
हर दिल में तेरा ही नूर हो।)
**शेर 3:**
तू है रहीम, तू है हकीम,
तेरे बिना सब कुछ है अधूरी तदबीर।
तू है जब्बार, तू है क़ह्हार,
तेरे हुक्म से सजी ये दुनिया के दीवार।
**तरन्नुम:**
(तेरा ही नाम हर जुबां पर हो,
तेरी इबादत ही मुकम्मल हो।
तेरी इबादत ही मुकम्मल हो।)
**शेर 4:**
तू है अल-हक़, तू है अल-रौफ,
तेरी बंदगी से जुड़ा हर एक सूफ़।
तू है अल-अज़ीम, तू है करीम,
तेरे बिना सब ख्वाब हैं नाकाम-ए-तालीम।
**तरन्नुम:**
(तू ही सुकून है, तू ही जहां,
तेरा करम रहे हर दास्तां।
तेरा करम रहे हर दास्तां।)
**ख़त्म:**
(तू है करीम, तू है रहीम,
बस तुझसे ही सब कुछ है।
तेरी बंदगी में है सुकून,
तेरी रहमत से सब कुछ है।)
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