Sunday, 5 July 2026

नज़्म

नज़्म: "तेरा ज़िक्र हर लम्हा"

तू है मलिक, तू है क़ुद्दूस, तू है सलाम,
हर सांस में तेरा ही है मुक़ाम।
तू है ग़फ़्फ़ार, तू है सत्तार,
गुनाहों का है तू परदा-दार।

तू अल्लाह, तू है वाहिद, तू ही सुमद,
तेरे नाम से जुड़ता है हर अहमद।
तू है बासित, तू है राफ़े,
मुश्किलों को कर दे आसान सफ़े।

तू करीम, तू रहीम, तू अल-हक़,
तेरी बंदगी में है हर दिल की चहक।
तू है नूर, तू है वहीद,
तेरे फ़ज़्ल से ही है ये सारी उम्मीद।

तू है अल-रहमान, तू अल-मालिक,
तेरी रहमतों का न हो कोई मालिक।
तू अल-रज़्ज़ाक, तू अल-ख़ालिक,
तेरे ही करम से हर दिल है मुसालिक।


........
**नज़्म: "तू ही सबका सहारा"**  
*(तर्ज़: नात-ए-रसूल के तरन्नुम में)*  

**शेर 1:**  
तू है वदूद, तू है वली,  
हर सांस में बस तेरा ही जली।  
तू है ग़फार, तू है सत्तार,  
तेरे करम से हर दिल गुलज़ार।  

**तरन्नुम:**  
(तू ही तो है, ओ मेरे मौला,  
तेरे बिना कोई भी ना सहारा।  
तेरे बिना कोई भी ना सहारा।)  

**शेर 2:**  
तू है नसीर, तू है बसीर,  
हर राह में तेरा ही ज़मीर।  
तू है मलिक, तू है क़ुद्दूस,  
तेरे फ़ज़ल से हर ग़म दूर।  

**तरन्नुम:**  
(तेरी रहमत की बारिश हो,  
हर दिल में तेरा ही नूर हो।  
हर दिल में तेरा ही नूर हो।)  

**शेर 3:**  
तू है रहीम, तू है हकीम,  
तेरे बिना सब कुछ है अधूरी तदबीर।  
तू है जब्बार, तू है क़ह्हार,  
तेरे हुक्म से सजी ये दुनिया के दीवार।  

**तरन्नुम:**  
(तेरा ही नाम हर जुबां पर हो,  
तेरी इबादत ही मुकम्मल हो।  
तेरी इबादत ही मुकम्मल हो।)  

**शेर 4:**  
तू है अल-हक़, तू है अल-रौफ,  
तेरी बंदगी से जुड़ा हर एक सूफ़।  
तू है अल-अज़ीम, तू है करीम,  
तेरे बिना सब ख्वाब हैं नाकाम-ए-तालीम।  

**तरन्नुम:**  
(तू ही सुकून है, तू ही जहां,  
तेरा करम रहे हर दास्तां।  
तेरा करम रहे हर दास्तां।)  

**ख़त्म:**  
(तू है करीम, तू है रहीम,  
बस तुझसे ही सब कुछ है।  
तेरी बंदगी में है सुकून,  
तेरी रहमत से सब कुछ है।)  


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नज़्म

नज़्म: "तेरा ज़िक्र हर लम्हा" तू है मलिक, तू है क़ुद्दूस, तू है सलाम, हर सांस में तेरा ही है मुक़ाम। तू है ग़फ़्फ़ार, तू है सत्तार...

Shakil Ansari