**मौलाए कायनात की नेमतों का बयान**
अल्लाह तआला की इस अज़ीम कायनात में उसकी बेशुमार नेमतें छुपी हुई हैं, जो इंसान की हर जरूरत को पूरा करने के लिए वजूद में आईं। हर नेमत में उसकी रहमत और बरकत का इज़हार है।
**सूरज और चाँद का निज़ाम**
खुदा-ए-पाक ने सूरज को रोशनी और गर्मी का सरचश्मा बनाया, जिससे यह कायनात रोशन और जिंदगी मुमकिन हुई। चाँद की ठंडी रोशनी रातों की ताजगी का सबब बनी। ये दोनों एक हिसाब से चलते हैं, जिससे इंसान वक़्त का हिसाब रखता है।
**जमीन की नेमतें**
जमीन को खुदा ने इंसान के लिए जन्नत का टुकड़ा बनाया। इसके सीने में फसलें, पानी के चश्मे, और खनिज छुपाए। फसलें हमारी भूख मिटाती हैं, पानी हमारी प्यास बुझाता है, और खनिज हमारे मकान और औज़ारों के काम आते हैं।
**हवा और पानी की अहमियत**
हवा को बिना रंग और शक्ल के बनाया, मगर इसमें जिंदगी का हर जरिया छुपा दिया। इसी तरह पानी को जिंदगी की बुनियाद बनाया, जिसके बिना इंसान का वजूद नामुमकिन है। ये खुदा की ऐसी नेमतें हैं जो हर पल हमारी मददगार हैं।
**इंसानी जिस्म की करामत**
इंसान का जिस्म खुदा की कुदरत का सबसे आला नमूना है। दिल की धड़कनें, आँखों की रौशनी, कानों की समाअत, और हाथों-पैरों की ताकत, ये सब अल्लाह की नेमतें हैं। इंसान अपने जिस्म के जरिये खुदा की दी हुई कुदरत का इस्तेमाल करता है।
**बुलंद परिंदे और गहरे समंदर**
खुदा ने परिंदों को परवाज़ का हुनर दिया और समंदरों को रहमतों का खज़ाना बनाया। परिंदों के पर इंसान को आजादी का पैगाम देते हैं, और समंदर से मिलने वाले मोती और मछलियाँ हमारे रहन-सहन को बेहतर बनाती हैं।
**खुदा की नेमतों का शुक्र**
हर मुसलमान पर फर्ज है कि वह इन नेमतों का शुक्र अदा करे। अल्लाह फरमाता है:
*"फबिऐय्यि आलाअि रब्बिकुमा तुकज्जिबान"*
(तो अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?)
**इंसान का फर्ज**
इंसान को चाहिए कि इन नेमतों का सही इस्तेमाल करे, बेजा इस्तेमाल और फिजूलखर्ची से बचे। शुक्रगुजार बने, नमाज और दुआ के जरिये अल्लाह का शुक्र अदा करे और उसकी बनाई हुई कायनात में अमन और इन्साफ कायम रखे।
**खुदा-ए-पाक की कुदरत पर शेर:**
*"खुदा की रहमतों का है जहाँ में हर तरफ चर्चा,
जो देखे उस कायनात को, बस कहे अल्हम्दुलिल्लाह।"*
यह पूरी कायनात अल्लाह की रहमतों का आईना है, जो हर पल हमें उसकी मौजूदगी का एहसास दिलाती है।
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