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“Equal Numbers, Infinite Memories”
(बराबर गिनती, अनगिनत यादें)
यह शीर्षक हमने यूँ ही नहीं चुना है।
इसके पीछे हमारे स्कूल का एक इतिहास, एक रिकॉर्ड, और एक खूबसूरत बदलाव छुपा हुआ है।
हमारा यह स्कूल सन 1996 में स्थापित हुआ था।
तब से लेकर आज तक, हर साल बच्चे-बच्चियाँ पढ़ते आए हैं, आगे बढ़ते आए हैं।
लेकिन अगर हम सच कहें,
तो अब तक ज़्यादातर लड़कियाँ आर्ट्स या होम साइंस ही चुनती रही थीं।
मैथ्स जैसे विषय को चुनना उनके लिए आसान नहीं माना जाता था।
📌 मगर इस सत्र 2025–26 में इतिहास बदला है।
इस बार पहली बार ऐसा हुआ है कि
सबसे ज़्यादा लड़कियों ने मैथ्स विषय को चुना है।
यह हमारे स्कूल का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।
आज लड़के और लड़कियाँ
बराबर संख्या में मैथ्स के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
यानी न कोई कम, न कोई ज़्यादा—
सब बराबर, सब साथ।
👉 इसी बराबरी को दर्शाने के लिए हमने “Equal Numbers” कहा।
और जो यादें इस सफ़र में बनी हैं—
क्लासरूम की हँसी,
टीचर्स की सीख,
गलतियों से सीखना,
और सपनों की उड़ान—
वो गिनी नहीं जा सकतीं।
👉 इसीलिए हमने कहा “ *Infinite Memories* ” — अनगिनत यादें।
मतला (Matla)
बराबर क़दमों से जो चलीं, वही राहें हैं
आज बेटियाँ भी मैथ्स में, ये नई निगाहें हैं
कभी जो डर थी किताबों से, सवालों से घिरी
आज उन्हीं हाथों में तालीम की चाहें हैं
सन उन्नीस सौ छियानवे से जो सपना था यहाँ
उस सपने की आज हक़ीक़त बनती पनाहें हैं
लड़के तो चलते रहे आगे, ये माना हमने
मगर आज बेटियों की भी मज़बूत गवाहें हैं
इक़्वल नंबर्स में छुपी है इक बड़ी सी बात
बराबरी से ही तो बनती कामयाब राहें हैं
यादें गिनी नहीं जातीं, ये हिसाब से बाहर
क्लासरूम की हँसी में ही अनगिनत दुआएँ हैं
*मक़्ता (Maqta)*
“ *शाकिल* ” ने दो हज़ार सत्रह से यही चाही दुआ
गाँव के बच्चों को मिले इल्म, यही तो निगाहें हैं
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