Friday, 6 December 2024

Hamd

### **हम्द**  
**अल्लाहु-अल्लाहु... अल्लाहु-अल्लाहु...**  

हर तरफ तेरा जलवा, हर शै में तेरा नूर,  
तू है वजूद हर जर्रे में, तुझसे रोशन ये दस्तूर।  

रब्बुल-आलमीन तू, हर दिल की सदा,  
रहमान-ओ-रहीम तू, हर मर्ज़ की दवा।  

तुझसे ये जमीन, तुझसे आसमान,  
तूने बख्शी ये कुदरत, तेरा एहसान।  

तू ही मालिक यौम-उद्दीन, तू ही रहमतों का दर,  
हर सजीदा तेरे आगे, हर नजर तुझ पर।  

इबादतें तेरी, सजदों में सुकून,  
तेरे नूर से है रौशन, ये रातें और ये दिन।  

हम तो बेबस बंदे, तुझसे आस लगाएं,  
तेरी रहमत के साए, तुझसे रौशनी पाएं।  

**अल्लाहु-अल्लाहु... अल्लाहु-अल्लाहु...**  
तू ही है सब कुछ, और तू ही काफ़ी,  
सकील तारीफें लिखें, ये ज़बां कभी ना हो ख़ाली।  
।।।।।
हर सिम्त में जलवा तेरा नूर दिखाई देता है,
हर जर्रा तेरे सजदे में झुका दिखाई देता है।

तू है मालिक, तू है माबूद, तू ही है क़य्यूम,
तेरे दम से हर मख़लूक़ को सुकून दिखाई देता है।

आसमां की बुलंदियां, ज़मीं की गहराइयां,
तेरी कुदरत का हर शाहकार दिखाई देता है।

तेरी रहमत हर माजलूम की आस बन जाए,
तेरे जिक्र से ही दिल को करार दिखाई देता है।

रहमान, रहीम, करीम तू ही है मेरे मालिक,
हर दिल में तेरा ही नूर-ए-इमान दिखाई देता है।

सजदा करूँ तेरे दर पे, मेरी हस्ती फना हो,
तेरी मोहब्बत में खुदा सब कुछ निछावर हो।

।।
सजदा करूँ तेरे दर पे, मेरी हस्ती फना हो,
तेरी मोहब्बत में खुदा सब कुछ निछावर हो।
इस शेर का मतलब है कि मैं तेरी बारगाह (दरबार) में सिर झुका कर ऐसा सजदा करना चाहता हूँ कि मेरी पूरी पहचान, मेरा वजूद मिट जाए। तेरी मोहब्बत और तेरे इश्क में इतनी गहराई है कि मैं अपनी हर चीज, अपनी जान और अपनी पहचान, सब कुछ कुर्बान करने को तैयार हूँ।
"ऐसा झुकना चाहता हूँ तेरे दर पे कि मेरी हस्ती मिट जाए, और तेरी मोहब्बत का ऐसा जलवा हो कि मेरी जान भी कुर्बान करने से पीछे न हटूँ। ये इश्क खुदा से है, जिसमें सब कुछ फना हो जाना ही इबादत का मकसद है।"

विस्तार से इस हम्द के बारे में 
इन पंक्तियों को आसानी से समझने के लिए हम इन्हें एक-एक करके विस्तार से समझेंगे और साथ ही कुरान और हदीस के संदर्भ में भी उनका विश्लेषण करेंगे। 

### 1. "हर सिम्त में जलवा तेरा नूर दिखाई देता है,  
हर जर्रा तेरे सजदे में झुका दिखाई देता है।"

यह शेर इस बात की तरफ इशारा करता है कि अल्लाह का नूर हर जगह फैला हुआ है, हर दिशा, हर स्थान पर उसके प्रकाश का असर है। इस पूरी कायनात में हर चीज़ का अस्तित्व अल्लाह की मरज़ी और उसके आदेश से है। जब हम किसी चीज़ को देखते हैं, तो हम उसके अंदर अल्लाह की ताक़त और मौजूदगी को महसूस कर सकते हैं।

**कुरान**:  
“اللَّهُ نُورُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ”  
(कुरान 24:35)  
अल्लाह ही आकाशों और ज़मीन का नूर है।

**हदीस**:  
“इस्तमअ'ल हदीस: “वॉयरियर इन् सैकड़ हद।” (हदीस इब्न माजा)  
हर स्थान पर अल्लाह का नूर व्याप्त है और उसी नूर से सृष्टि का हर प्राणी उसका शुक्र अदा करता है।

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### 2. "तू है मालिक, तू है माबूद, तू ही है क़य्यूम,  
तेरे दम से हर मख़लूक़ को सुकून दिखाई देता है।"

यह शेर हमें यह याद दिलाता है कि अल्लाह ही हमारा मालिक है, और वही हमारी ज़िंदगी की ज़िम्मेदारी और हर चीज़ का नियंत्रण करता है। वह सर्वशक्तिमान है और किसी भी जीव का पालन और सुरक्षा उसी के हाथ में है। उसके बिना कोई जीव अस्तित्व में नहीं रह सकता।

**कुरान**:  
“اللَّهُ لَا إِلٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ”  
(कुरान 2:255)  
अल्लाह ही है, उसके सिवा कोई उपास्य नहीं, वही जीवित और सशक्त है।

**हदीस**:  
“जो कुछ भी हैं, वह अल्लाह के हुक्म से हैं।” (सहीह अल-बुखारी)

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### 3. "आसमां की बुलंदियां, ज़मीं की गहराइयां,  
तेरी कुदरत का हर शाहकार दिखाई देता है।"

यह पंक्ति बताती है कि आसमान और ज़मीन में जितनी भी खूबसूरती और शक्ति दिखाई देती है, वह सारी अल्लाह की कुदरत का असर है। हर पहाड़, हर दरिया, हर पेड़, सब कुछ उसकी कुदरत की मिसाल है।

**कुरान**:  
“सिर्फ़ अल्लाह की कुदरत में वह ताक़त है कि वह आकाशों और ज़मीन की रचना करता है।”  
(कुरान 30:48)

**हदीस**:  
"अल्लाह का रचनात्मक काम कुदरत की सबसे बड़ी निशानी है।" (सहीह मुस्लिम)

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### 4. "तेरी रहमत हर माजलूम की आस बन जाए,  
तेरे जिक्र से ही दिल को करार दिखाई देता है।"

इस शेर में अल्लाह की रहमत की बात की गई है। अल्लाह की रहमत हर दुखी और परेशान व्यक्ति के लिए सुकून का कारण बनती है। जब हम अल्लाह का जिक्र करते हैं, तो हमारी आत्मा को शांति मिलती है और दिल को सुकून मिलता है।

**कुरान**:  
“وَرَحْمَتِي وَسِعَتْ كُلَّ شَيْءٍ”  
(कुरान 7:156)  
मेरी रहमत ने हर चीज़ को अपनी हद में ले लिया है।

**हदीस**:  
“अल्लाह की रहमत हर चीज़ से बड़ी है।” (सहीह मुस्लिम)

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### 5. "रहमान, रहीम, करीम तू ही है मेरे मालिक,  
हर दिल में तेरा ही नूर-ए-इमान दिखाई देता है।"

इस शेर में अल्लाह के तीन प्रमुख नामों—रहमान (दयालु), रहीम (कृपालु), और करीम (सर्वशक्तिमान)—का जिक्र किया गया है। अल्लाह के ये नाम उसके गुणों को दर्शाते हैं और इन गुणों के कारण ही हर दिल में ईमान और नूर पाया जाता है।

**कुरान**:  
“الرَّحْمَنُ الرَّحِيمُ”  
(कुरान 1:3)  
वह दयालु है, कृपालु है।

**हदीस**:  
“अल्लाह के सत्ताईस नाम हैं, जिनसे कोई भी उसे पुकारे तो वह उसकी दुआ सुनता है।” (सहीह मुस्लिम)

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### 6. "सजदा करूँ तेरे दर पे, मेरी हस्ती फना हो,  
तेरी मोहब्बत में खुदा सब कुछ निछावर हो।"

यह शेर इस बात को कहता है कि हम अल्लाह के सामने सजदा करते हैं और हमारी पूरी ज़िंदगी और पहचान उसकी मोहब्बत के सामने समर्पित हो जाती है। जब हम अल्लाह से प्यार करते हैं, तो हम अपने सारे अहंकार और खुद को उसकी राह में समर्पित कर देते हैं।

**कुरान**:  
“وَأَنَّ الْمَسَاجِدَ لِلَّهِ”  
(कुरान 72:18)  
सिर्फ़ अल्लाह के लिए मस्जिदें हैं और उसे ही सजदा करना चाहिए।

**हदीस**:  
“जो अपने आप को अल्लाह के समर्पित करता है, उसे ही असल शांति मिलती है।” (सहीह मुस्लिम)

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### 7. "शकील के अल्फाज़ों में तेरी ही तारीफें हों,  
तेरी रहमत से हर दिल रोशन दिखाई देता है।"

यह शेर यह बताता है कि हम अपनी ज़िंदगी में जो भी अच्छाई देख सकते हैं, वह सब अल्लाह की तारीफ और रहमत से है। हर व्यक्ति का दिल सिर्फ़ अल्लाह की रहमत से ही रोशन होता है।

**कुरान**:  
“إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ الَّذِينَ يُحْسِنُونَ”  
(कुरान 3:134)  
अल्लाह उन लोगों को पसंद करता है जो अच्छाई करते हैं।

**हदीस**:  
“अल्लाह का नाम हमेशा लिया जाए, दिल रोशन होता है।” (सहीह अल-बुखारी)

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### 8. "शकील कहे, रहमत-ए-खुदा से मुनव्वर हो,  
हर दर्दमंद को खुदा का दर दिखाई देता है।"

यह शेर इस बात पर जोर देता है कि अल्लाह की रहमत से ही अंधेरे में रोशनी मिलती है और दुखी दिलों को राहत मिलती है। अल्लाह का दर ही वह स्थान है, जहाँ हर समस्या का समाधान मिलता है।

**कुरान**:  
“إِنَّ اللَّهَ يَفْعَلُ مَا يَشَاءُ”  
(कुरान 3:40)  
अल्लाह जो चाहता है वह करता है।

**हदीस**:  
“अल्लाह का दर हमेशा खुला है, जो भी उसकी तरफ मुड़ता है वह कभी निराश नहीं होता।” (सहीह अल-बुखारी)

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### 9. "ऐ "शकील," तेरे अशआर में तौहीद का जिक्र है,  
हर लफ्ज़ से तेरा ईमान-ओ-इस्लाम झलकता है।"

यह शेर तौहीद (अल्लाह की एकता) की अहमियत को बताता है। शकील के शब्दों में अल्लाह की एकता का अहसास होता है और उनके हर शेर में इस्लाम का संदेश छिपा होता है।

**कुरान**:  
“اللَّهُ أَحَدٌ”  
(कुरान 112:1)  
अल्लाह एक है।

**हदीस**:  
“जो अल्लाह की एकता में विश्वास करता है, वह सच्चा मुसलमान है।” (सहीह मुस्लिम)

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"शकील के अल्फाज़ों में तेरी ही तारीफें हों,
तेरी रहमत से हर दिल रोशन दिखाई देता है।"

"शकील कहे, रहमत-ए-खुदा से दिल मुनव्वर हो,
हर दर्दमंद को खुदा का दर दिखाई देता है।"

'ऐ "शकील," तेरे अशआर में तौहीद का जिक्र है,
हर लफ्ज़ से तेरा ईमान-ओ-इस्लाम झलकता है।

यह शायरी शकील के अल्फाज़ में बखूबी इन्कलाब और तौहीद का जिक्र करती है। शकील की शायरी का हर अल्फाज़ अपनी गहरी रूहानी और धार्मिक सोच को उजागर करता है। आइए, हर शब्द और विचार को विस्तार से समझें:

**"शकील के अल्फाज़ों में तेरी ही तारीफें हों,"**  
यह शेर अल्लाह की तारीफ में ढलते शकील के अल्फाज़ों का इशारा करता है। 'शकील' शब्द की जड़ें भी तौहीद में हैं, जो उस शख्स के हिदायत को दर्शाती हैं, जो अल्लाह के बारे में गहरे विचार करता है। यहाँ शकील का मतलब है ‘सज्जन, सुंदर और मोहब्बत से भरा इंसान’। शकील का हर लफ्ज़ अल्लाह की रहमत और उसकी तारीफ से रोशन होता है। 

**"तेरी रहमत से हर दिल रोशन दिखाई देता है।"**  
यह शेर अल्लाह की रहमत की बात करता है। क़ुरआन में अल्लाह का नाम "रहमान" (जो बहुत मेहरबान है) आता है, जिसका मतलब है कि अल्लाह की रहमत से हर दिल में रोशनी और हिम्मत आ जाती है। यहाँ पर यह शेर यह बताता है कि जब अल्लाह की रहमत होती है, तो इंसान का दिल रोशन हो जाता है, जैसे अंधेरे में एक रोशनी आ जाती है।

**"शकील कहे, रहमत-ए-खुदा से दिल मुनव्वर हो,"**  
यह शेर भी शकील के विचारों की गहराई को दर्शाता है। 'मुनव्वर' का मतलब है उजाला, और यहाँ शकील यह कह रहे हैं कि अल्लाह की रहमत से इंसान का दिल रोशन और पाक हो जाता है। इस विचार का मक्सद यह है कि इंसान जब खुदा की रहमत में समाहित होता है, तो उसके दिल में सच्चाई और ईमान का उजाला आता है। 

**"हर दर्दमंद को खुदा का दर दिखाई देता है।"**  
यह शेर यह संदेश देता है कि जब इंसान अपने दर्द और समस्याओं के साथ अल्लाह के दर पर पहुंचता है, तो उस दर से उसे राहत और सुकून मिलता है। क़ुरआन और हदीस में अल्लाह से हमेशा मदद मांगने की शिक्षा दी गई है, और इस शेर में यह बात प्रस्तुत की गई है कि अल्लाह का दर सबसे बड़ा दर है, जहां से हर दर्द और परेशानी का इलाज मिलता है।

**"ऐ 'शकील,' तेरे अशआर में तौहीद का जिक्र है,"**  
यह शेर यह बताता है कि शकील के हर अशआर में तौहीद का जिक्र है। 'तौहीद' का मतलब है अल्लाह की एकता पर विश्वास करना, जो कि इस्लाम का मूल सिद्धांत है। इस शेर में शकील के अशआर में ईमान और तौहीद का अक्स साफ दिखता है।

**"हर लफ्ज़ से तेरा ईमान-ओ-इस्लाम झलकता है।"**  
यह शेर यह बताता है कि शकील के शब्दों से इस्लाम और ईमान की सच्चाई का अहसास होता है। उनका हर शब्द अल्लाह के सच्चे बंदे के ख्यालात और विश्वास को दर्शाता है। 

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**शेर का पूरा तर्जुमा:**  
शकील के इन अल्फ़ाज़ों में जो संदेश है, वह यह है कि इंसान की जिंदगी में अल्लाह की रहमत, तौहीद और इस्लाम के सिद्धांत की बुनियाद होनी चाहिए। शकील का यह तर्क है कि अल्लाह के हर नाजुक हुक्म और रहमत से इंसान का दिल रोशन हो जाता है और हर दर्दमंद को सिर्फ और सिर्फ अल्लाह का दर दिखाई देता है। शकील अल्लाह के बंदे हैं, और उन्होंने अपने ख्यालात और नजरिए को अल्लाह की रहमत से जोड़ा है। शकील अपने अशआर के जरिए न केवल खुदा की तारीफ करते हैं, बल्कि एक मजबूत मुसलमान की पहचान भी पेश करते हैं।

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**हदीस और क़ुरान से जुड़ी बातें:**  
**हदीस:**  
"अल्लाह की रहमत को चाहने वाला उसके पास जाएगा, और उसकी रहमत से दिलों का मुनव्वर होना केवल उसी के हाथ में है।" (सहीह मुस्लिम)

**क़ुरआन:**  
"क्या तुम नहीं देखते कि अल्लाह की रहमत से जिंदगियाँ जागृत होती हैं?" (क़ुरआन 57:6)  
यह आयत बताती है कि अल्लाह की रहमत से दिलों में रोशनी आती है और इंसान का जीवन बेहतर बनता है।

**इंसान को मोटिवेशन:**  
यह शायरी इंसान को यह सिखाती है कि अल्लाह की रहमत पर विश्वास रखने से ही जीवन में सुकून और मार्गदर्शन मिलता है। शकील के शब्दों में यह संदेश है कि जब इंसान खुदा की राह पर चलता है, तो उसका दिल रोशन हो जाता है, और उसका हर कदम इस्लाम के सिद्धांतों से प्रेरित होता है।  
इस शायरी का मकसद यह है कि इंसान को अल्लाह की रहमत से जुड़े रहकर अपने जीवन को बेहतर बनाने का रास्ता अपनाना चाहिए।


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ऐ रब्बे करीम, हम तेरी बंदगी में झुक जाते हैं,
तेरे हर नाम से मोहब्बत का सबक़ पाते हैं।
हर सांस में तेरी याद का एक फ़साना हो,
तेरी रहमत से हर लम्हा रोशन और सुहाना हो।


यह नज़्म अल्लाह तआला की तारीफ़ और उसकी रहमतों की याद में लिखी गई है। इसमें हिंदुस्तानी अंदाज़ की एक खास रवायत झलकती है, जो इश्के-इलाही और मोहब्बत-भरी बंदगी को बयान करती है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:

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### **ऐ रब्बे करीम, हम तेरी बंदगी में झुक जाते हैं**
यह पंक्ति अल्लाह के सामने इंसान की फ़रमाबरदारी और उसकी अजमत को मानने का इज़हार करती है। हिंदुस्तानी अंदाज़ में इसे इस तरह महसूस किया जा सकता है कि जैसे एक सच्चा मोमिन अपनी नमाज़, दुआ, और इबादत के ज़रिये अपनी मोहब्बत और वफ़ादारी का इज़हार कर रहा हो। 

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### **तेरे हर नाम से मोहब्बत का सबक़ पाते हैं।**
इस पंक्ति में अल्लाह के 99 नामों (अस्मा-उल-हुस्ना) की बात है, जिनमें हर नाम में एक अलग रहमत और सिफत छुपी हुई है। हिंदुस्तानी कलामों में अल्लाह के नामों को ग़ज़ल और नात की तरह गाया जाता है, जिसमें मोहब्बत और अकीदत का समंदर बहता है। 

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### **हर सांस में तेरी याद का एक फ़साना हो,**
यहां बंदा अपनी हर सांस को अल्लाह की याद के साथ जोड़ता है। हिंदुस्तानी नज़्मों और कव्वालियों में यह जज़्बा अक्सर देखा जाता है, जहां हर सांस को अल्लाह के इश्क में डुबो दिया जाता है। जैसे मशहूर शायरों की नज़्मों में "इश्के-हक़ीक़ी" (सच्चे इश्क) की बात होती है। 

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### **तेरी रहमत से हर लम्हा रोशन और सुहाना हो।**
यह पंक्ति अल्लाह से दुआ है कि उसकी रहमत हमेशा ज़िंदगी को रोशन और आसान बनाए रखे। हिंदुस्तानी अंदाज़ में इसे इस तरह बयान किया जा सकता है कि जैसे एक बच्चा अपनी मां से मोहब्बत भरे लहजे में अपनी ज़रूरतें बयान करता है, वैसे ही यह नज़्म अल्लाह से रहमतों और बरकतों की इल्तिजा करती है।

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### हिंदुस्तानी अंदाज़ में व्याख्या:
1. **जज़्बात की गहराई:** हिंदुस्तानी में रूहानी मोहब्बत को बहुत अहमियत दी जाती है। इस नज़्म में भी अल्लाह से जुड़ाव का इज़हार बेहद मोहब्बत और अकीदत के साथ किया गया है।
   
2. **लफ़्ज़ों की नर्मी:** नज़्म के हर लफ़्ज़ में वो नर्मी और सुकून है, जो हिंदुस्तानी शायरी की खासियत है। यह अंदाज़ लोगों के दिलों में गहरी जगह बनाता है।

3. **काव्यात्मक शैली:** नज़्म का हर शेर कव्वाली या नात की तरह महसूस होता है, जिसे सुनने वाले अपनी रूह में महसूस कर सकते हैं।

4. **रूहानी असर:** इस नज़्म का पाकिस्तानी अंदाज़ इसलिए खास बनता है क्योंकि यह इंसान के दिल को अल्लाह के इश्क में खो जाने पर मजबूर कर देता है। 

**सपोर्टिंग शेर:**  
   *"तू है करीम, तू है रहीम, बस तुझसे ही सब कुछ है,  
   तेरी बंदगी में है सुकून, तेरी रहमत से सब कुछ है।"*


Saturday, 30 November 2024

हलाल कमाई का फरमान: डॉक्टर और इस्लामिक उसूल"

"रिज्के हलाल ही से रोशन जहान होता है,
हराम की कमाई से बर्बाद इंसान होता है।"
मरीजों के दर्द को जो समझे वो मुकम्मल डॉक्टर है,
वरना दौलत का लालच इंसान को मखौल करता है।"

इलाज का मकसद दौलत नहीं, राहत हो,
हर दर्द के लिए दिल में शफकत हो।"

"हलाल कमाई का जो रखे ईमानदार सबक,
वही है वो इंसान, जो करे अल्लाह से दस्तक।"

"दर्द का मरहम और राहत की शान बनो,
मरीजों के लिए दुआओं की पहचान बनो।"


**एक मुसलमान की कमाई का सही तरीका: कुरान और हदीस के मुताबिक** 
 

इस्लाम में कमाई का एक पाक और सही तरीका होना अनिवार्य है ताकि न केवल दुनिया में तरक्की हासिल हो, बल्कि आखिरत में भी कोई नुकसान न हो। कुरान और हदीस की रोशनी में कुछ अहम बातें नीचे पेश की जा रही हैं, खासकर डॉक्टर जैसे पेशों के लिए:  

### **1. कमाई का हलाल होना जरूरी है**  
कुरान में फरमाया गया:  
*“और जो हलाल और पाक चीजें अल्लाह ने तुम्हें दी हैं, उन्हें खाओ और शैतान के रास्ते पर न चलो। वह तुम्हारा खुला दुश्मन है।”* (सूरतुल बकरा: 168)  

हर मुसलमान को चाहिए कि अपनी कमाई हलाल तरीकों से करे। डॉक्टर हो या किसी और पेशे से ताल्लुक रखते हों, रिश्वत, धोखाधड़ी, झूठ या हराम चीजों से बचें। मरीजों का गलत फायदा न उठाएं और जरूरत से ज्यादा फीस न लें।  

### **2. नियत का पाक होना**  
हदीस में है:  
*“अल्लाह तुम्हारे आमाल को तुम्हारी नियत के मुताबिक क़ुबूल करता है।”* (सहीह बुखारी)  

डॉक्टर के लिए जरूरी है कि वह मरीज की मदद एक इबादत समझकर करे, न कि सिर्फ पैसे कमाने का जरिया। मरीज़ की भलाई को अपनी प्राथमिकता बनाए।  

### **3. धोखाधड़ी और जालसाजी से बचें**  
हदीस में है:  
*“जो हम में धोखा देता है, वह हम में से नहीं है।”* (सहीह मुस्लिम)  

डॉक्टर को गलत दवाएं लिखने, मरीजों को गैर-जरूरी टेस्ट कराने या झूठे इलाज बताने से बचना चाहिए।  

### **4. इंसाफ और ईमानदारी अपनाएं**  
कुरान में फरमाया गया:  
*“और इंसाफ करो, अल्लाह इंसाफ करने वालों को पसंद करता है।”* (सूरतुल माएदा: 42)  

डॉक्टर को अपने काम में ईमानदारी और इंसाफ बरतना चाहिए। अमीर और गरीब मरीजों में फर्क न करें।  

### **5. आखिरत की फिक्र करें**  
हदीस में है:  
*“इस दुनिया में ऐसे जियो जैसे एक मुसाफिर हो। आखिरत को अपनी मंज़िल समझो।”* (सहीह बुखारी)  

कमाई का हर हिस्सा सोच-समझकर इस्तेमाल करें। हर महीने अपनी कमाई का कुछ हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को जकात और सदक़ा के तौर पर दें।  

### **6. गुनाह और हराम कामों से बचें**  
कुरान में फरमाया गया:  
*“और गुनाह और सरकशी में एक-दूसरे की मदद न करो।”* (सूरतुल माएदा: 2)  

डॉक्टर को चाहिए कि हराम तरीकों, जैसे भ्रूण हत्या या गलत मेडिकल प्रक्रियाओं से बचें।  

### **निष्कर्ष**  
डॉक्टर हो या कोई और पेशा, इस्लाम ने कमाई के लिए पाक और हलाल तरीके अपनाने पर जोर दिया है। मरीजों की भलाई करें, नियत साफ रखें, और ईमानदारी के साथ काम करें। आखिरत को हमेशा याद रखें, क्योंकि वहीं हमारी असली कामयाबी है।  

*“रिज्क को हलाल बनाओ और अल्लाह पर यकीन रखो, तुम्हारे लिए दरवाजे खुल जाएंगे।”*

================== इसे 2037 से इस्तेमाल किया जाएगा इशाल्लाह=================

......### डॉक्टर और मुसलमान के लिए इस्लाम में हलाल कमाई का महत्व  
इस्लाम में कमाई का मकसद सिर्फ दुनिया में तरक्की करना नहीं है, बल्कि आखिरत की तैयारी भी है। कमाई ऐसी होनी चाहिए जिससे न अल्लाह नाराज़ हों, न दूसरों को नुकसान पहुँचे। **डॉक्टर** जैसे पेशेवर लोगों को ख़ास तौर पर अपनी कमाई के मामले में ईमानदार और साफ-सुथरा तरीका अपनाना चाहिए, क्योंकि उनकी जिम्मेदारी सीधे लोगों की जान और सेहत से जुड़ी होती है।  

#### इस्लामिक गाइडलाइंस हलाल कमाई के लिए (हदीस और कुरान के अनुसार)  
1. **हलाल और हराम का फर्क समझें**  
   कुरान में अल्लाह फरमाते हैं:  
   _"और हलाल और पाक चीज़ें खाओ, जो अल्लाह ने तुम्हें दी हैं, और अल्लाह से डरो, जिस पर तुम ईमान रखते हो।"_  
   (**सूरह अल-माइदा: 88**)  
   डॉक्टर को चाहिए कि अपनी कमाई का जरिया हमेशा हलाल रखें। मरीज़ से सही फीस लें और गलत तरीकों से पैसे कमाने से बचें, जैसे:  
   - ग़लत टेस्ट्स लिखना।  
   - बिना ज़रूरत के दवाईयां देना।  
   - मरीज़ को महंगी चीज़ों के लिए मजबूर करना।  

2. **धोखाधड़ी से बचें**  
   हदीस में आता है:  
   _"जिसने धोखा दिया, वह हममें से नहीं है।"_  
   (**सहीह मुस्लिम: 102**)  
   डॉक्टर को चाहिए कि मरीज़ की हालत को बढ़ा-चढ़ाकर न बताएं और न ही उन्हें ऐसे इलाज के लिए मजबूर करें जिसका कोई फायदा न हो।  

3. **मरीज की सेहत को पहली प्राथमिकता दें**  
   डॉक्टर की जिम्मेदारी है कि वह मरीज को सही सलाह दे। गलत तरीके से पैसा कमाने के बजाय उसकी सेहत को अहमियत दें।  

4. **ईमानदारी से फीस तय करें**  
   डॉक्टर को अपनी फीस और अन्य खर्चों को सही और ईमानदार तरीके से तय करना चाहिए। फीस ऐसी हो जो मरीज़ की पहुंच में हो।  
   _"और माप और तोल को इंसाफ के साथ पूरा करो।"_  
   (**सूरह अल-अनआम: 152**)  

5. **हराम काम और दवा से बचें**  
   ऐसी दवाइयाँ न दें जो नुकसानदायक हो या इस्लाम में हराम मानी जाती हों। साथ ही, रिश्वत लेकर गलत मेडिकल रिपोर्ट बनाना सख्ती से मना है।  
   हदीस में है:  
   _"अल्लाह उस पर लानत करता है जो रिश्वत देता है और जो रिश्वत लेता है।"_  
   (**सुनन अबू दाऊद: 3580**)  

#### मौजूदा दौर में डॉक्टरों की गलतियां और सुधार के सुझाव  
1. **गलत रिपोर्ट बनाना**: पैसा कमाने के लिए झूठी मेडिकल रिपोर्ट तैयार न करें।  
2. **ज्यादा महंगी दवाइयाँ लिखना**: जिन मरीजों की आर्थिक स्थिति कमजोर है, उनके लिए सस्ती और जरूरी दवाइयों का विकल्प दें।  
3. **अनावश्यक टेस्ट करवाना**: मरीज़ को सिर्फ वही टेस्ट करवाने के लिए कहें जो उनके इलाज के लिए जरूरी हो।  
4. **शरीयत के खिलाफ काम**: मरीज़ की जान बचाने के नाम पर कोई ऐसा काम न करें जो शरीयत के खिलाफ हो।  

#### डॉक्टरों के लिए ईमानदार कमाई के सुझाव  
1. **नियत साफ रखें**  
   हमेशा अपनी कमाई की नीयत को साफ रखें। अपने पेशे को इबादत समझें।  
2. **ग़रीब मरीज़ों का ख्याल रखें**  
   जो मरीज़ फीस देने की हालत में न हों, उनकी मदद करें।  
3. **सादगी अपनाएँ**  
   अपनी जिंदगी में सादगी रखें और अनावश्यक खर्चों से बचें।  
4. **अल्लाह से तौबा और मदद मांगें**  
   हदीस में आता है:  
   _"जो अल्लाह से तौबा करता है, अल्लाह उसकी गलतियां माफ करता है।"_  
   (**सहीह बुखारी**)  

#### नसीहत  
डॉक्टर को चाहिए कि वह अपने पेशे को दीन और दुनिया, दोनों के लिए इबादत का जरिया समझे। सही तरीके से कमाया गया पैसा ही आखिरत में काम आएगा। कुरान और हदीस की गाइडलाइंस पर चलते हुए ईमानदारी से कमाई करें और अल्लाह की रज़ा को अपने जीवन का मकसद बनाएं।


कविता: "डॉक्टर और मरीज का रिश्ता"
"दर्द की दास्तां सुनने वाला फरिश्ता है,
डॉक्टर ही तो मरीज का सच्चा दोस्ता है।
रहम का हाथ बढ़ाए, हर दर्द मिटाए,
खुदा की रहमत का, जो पैगाम लाए।"

"इलाज में ईमानदारी जब जुड़ जाए,
हर मरीज का दिल दुआओं से भर जाए।
हलाल कमाई से जो दिल को सुकून दे,
वही डॉक्टर खुदा की रहमत से नूर ले।"

"हर नब्ज़ में जो देखे इंसानियत का काम,
वो डॉक्टर बने, हर दिल का सलाम।
दौलत नहीं, नेक नीयत का हुनर रखो,
हर गरीब के दर्द में अपना घर रखो।"


हर दर्द में सब्र से जो बढ़े कदम,
खुदा की रहमत में है हर मर्ज़ का मरहम।"

बीमारी भी इम्तिहान है, तौबा का पैगाम,
हर मरीज की दुआ, छुपा रखती है अल्लाह का सलाम।"

"इलाज तो डॉक्टर करेगा, मगर शिफा खुदा से है,
हर दर्द के पीछे एक रहमत की वज़ह है।"

"दवा के साथ दुआ पर भी एतबार करो,
खुदा पर भरोसा रखो और हाल सुधार करो।"


गाने जैसी शायरी
*"तू है मसीहा, दर्द मिटा,
रब का करम, तेरा रास्ता।
हर मुस्कान में तेरा नाम,
दुआओं में बस तेरा मकाम।


तूने जख्मों को सहलाया,
बिना किसी चाह के निभाया।
हर रग में तेरी दवा चली,
तूने उम्मीदों को फिर जगाया।

तेरे हाथों में जादू है,
तेरे लफ्जों में दुआ है।
तू है वो रोशनी,
जो अंधेरों को मिटा है।

पैसे से ऊपर तेरा मकाम,
दिलों में बसाया तूने नाम।
तेरी बातों में सुकून छिपा,
तूने हर डर को दूर किया।

इल्म तेरा है खुदा की अमानत,
शिफा तेरे हाथों में इबादत।
हर मरीज की तुझसे यही दुआ,
रहे पाक तेरा हर रास्ता।

पैसा नहीं, बस नेकी कमा,
हर दिल की आवाज़ को सुन ज़रा।
गरीब का साथी, अमीर का दोस्त,
डॉक्टर, तू है दुनिया की रोशनी का स्रोत।

इल्म तेरा खुदा की अमानत है,
शिफा तेरे हाथों में इबादत है।
हर मरीज की तुझसे ये फरियाद,
रख पाक अपना दिल, न कर कोई जुल्म।*"



कविता: डॉक्टर, मरीज और खुदा के नाम
"एक अल्फाज़ खुदा से निकलकर,
डॉक्टर बना हर दर्द का मलहम।
मरीजों की चीखों में जो सुकून लाए,
वो है इस पेशे का असल मरकज़।

गरीब का सहारा बन, तू खुदा की कसम खा,
हर सांस की कद्र कर, हर दर्द मिटा।
फीस कम हो या ज्यादा, नीयत पाक रख,
मरीज की आहों से दूर अपना रास्ता रख।

दवा से ज्यादा दुआ का काम होता है,
हर दिल से खुदा का सलाम होता है।
हलाल कमाई में है हर मर्ज़ की शिफा,
हराम की दौलत में बस तबाही का नफा।

तो चल, डॉक्टर! बन इमान का गुलाम,
दुआओं में मिलेगी तुझे नाम और आराम।
मरीजों की मुस्कान में जन्नत का पता,
खुदा की रहमत से जुड़ा हर रिश्ता।*"



डॉक्टर और मरीज पर बेहतरीन शायरी
1."इलाज से पहले दिल का इलाज जरूरी है,
डॉक्टर की ईमानदारी मरीज की शिफा पूरी है।"

2."जो दर्द को समझे, वो ही असली डॉक्टर है,
लालच से बचकर, वही खुदा का बंदा बेहतर है।"

3."गरीब की मदद, अमीर का इलाज समान हो,
ऐसा डॉक्टर बनो, कि खुदा का एहसान हो।"

4."दवा नहीं, दुआ का सहारा बनो,
मरीज के दिल का चैन और करार बनो।"

5."इल्म और ईमान से जो पेशा बनाए,
वही खुदा के दरबार में मुकम्मल पाए।"

कविता: "डॉक्टर, मरीज और खुदा की रहमत"
शुरुआत:
"सबसे बड़ा है वो, सबकी दुआओं का जवाब,
जो दर्द देता है, वही शिफा का मालिक रब।"

अल्लाह की बात:
"खुदा की रहमत से जो चल सके नेक राह,
हर कमाई हो हलाल, हर अमल हो साफ।
*कुरान कहे, 'सच और इंसाफ पे चलो,'
हर पेशा इबादत बने, ऐसा मकसद रखो।"

डॉक्टर का फरमान:
"इलाज करो ऐसा, कि खुदा भी मुस्कुराए,
हर गरीब का दर्द देखो, दिल में दर्द समाए।
माल का लालच नहीं, नेकी का हो काम,
हर मरीज कहे, 'डॉक्टर, खुदा का नाम।'"


मरीज की फरियाद:
"डॉक्टर, दवा से पहले दुआ जरूरी है,
*तेरी ईमानदारी ही तो खुदा की रोशनी है।
खाली हाथ आए हैं, भरोसा तुझ पर किया,
इलाज सस्ता कर, हमें जिंदा रहने दिया।"

नसीहत:
"अल्लाह कहे, जो इंसान दर्द बांटे, वही नेक,
*हर गरीब की मदद, बनाओ ये धर्म का एक।
*डॉक्टर का पेशा है सबसे पाक,
न शोषण करो, न लोहराम की झलक।"

अंत:
"दवा से ज्यादा काम करती है दुआ,
*जो दिल से निकलती, वही बने शिफा।
डॉक्टर, मरीज और खुदा का ये फरमान,
इंसानियत बचाओ, यही है सबसे बड़ा ईमान।"


**हबीब का पैग़ाम**  

1. **ख़ुदा की राह चलो ऐ मेरी क़ौम प्यारी,**  
   **न पीछे देखो अब, ये ज़िंदगी उधारी।**  

2. **जो नेग ना मांगे, वो सच्चा रहनुमा है,**  
   **जो राह दिखाए, वही असल आसरा है।**  

3. **तुम्हारी ग़फ़लतों से उजड़ गई बहारें,**  
   **ख़ुदा का नाम लो, बचेंगी सब नज़ारें।**  

4. **ये जो एलची आए, फ़लक से सबूत लाए,**  
   **इनकी बात मानो, सब हक़ तुम्हें बताए।**  

5. **मैं दौड़कर आया, ये बात कहने को,**  
   **ख़ुदा की राह पाओ, ग़लत ना रहने दो।**  

6. **न बुत को पूजो तुम, न जिद पर अड़े रहो,**  
   **ख़ुदा की बंदगी में सुकून पाओ, बहो।**  

7. **जो हद से गुज़रे, वो खो गया ग़लत राह,**  
   **ख़ुदा से डरते रहो, यही है सच्ची चाह।**  

8. **जो बात सही है, उसे दिल में बसा लो,**  
   **ख़ुदा से रिश्ता रखो, मोहब्बत को सजा लो।**  

9. **अगर हबीब की बातों पे यक़ीन होगा,**  
   **ख़ुदा के दर पे तुम सबको सुकून होगा।**  

10. **तो ऐ मेरी क़ौम, अब हक़ को मान लो,**  
    **ख़ुदा की रहमतें, दिलों में ठान लो।**  





नज़्म **"पैग़ाम-ए-यासीन"**

1. अल्लाह के नाम से जो रहमत में सारा,  
   दिलों में बसाया, जहां को संवारा।  

2. दिलों का है मालिक, वो सबको दिखाए,  
   जो ईमान लाए, उन्हें राह दिखाए।  

3. क़ुरआन का दिल है यासीन का फ़साना,  
   हर लफ़्ज़ में नूर, हर बात है नज़राना।  

4. रसूल का पैग़ाम, सुन लो ऐ जहाँ,  
   नेकियां बढ़ाओ, रखो दिल जवां।  

5. मौत के सफ़र में जो यासीन पढ़ाए,  
   राहत की बारिश उस पर बरसाए।  

6. इल्म के रास्ते से जो दौलत कमाए,  
   वही नेकियों का गहना बनाए।  

7. बिदअतें बुरी हैं जो हटाए सुन्नत,  
   राहे-हक़ को वो करें बेअदब नफ़रत।  

8. वो पैग़ाम-ए-ख़ुदा जो दिल तक पहुंचे,  
   सीधी राह वाले उस पर झुकें।  

9. नेक तरीक़े छोड़ गए जो पीछे,  
   सदियों तलक उनकी रूह जीते।  

10. रहमत से जो डर, बेदेखे करे सजदा,  
    जन्नत है इनाम, वो ही बने प्यारा।  

11. राह दिखाए जो, सच्चाई का चश्मा,  
    हर अमल का हिसाब है लौह-ए-महफ़ूज़ में जमा।  

12. कुफ़्र की राह में जो बहके,  
    रहमत का रस्ता वो कैसे देखें।  

13. नेक राह पर चलने वालों का जलवा,  
    दुनिया में रोशन, आख़िरत में पायें सवाब का सपना।  

14. हबीब की बात थी जो दिलों में उतरती,  
    ऐ क़ौम! सुनो, राहे-हक़ की तरफ़ चलो सच्ची।  

15. जो मांगे नेग न, वो इल्म से भरे हैं,  
    वो हैं रहनुमा, वो रौशनी के तारे हैं।  

16. मौत के सफ़र में जो अपने सहारे,  
    यासीन के लफ़्ज़ बनें उनके इशारे।  

17. कुफ़्र के पर्दे को हटाओ ऐ इंसान,  
    देखो हक़ीक़त, ये है अल्लाह का फ़रमान।  

बिदअत से बचना, सुन्नत को अपनाना,
राहे-हक़ पे चलना, सबको समझाना।

 हबीब की बातें जो दिल तक उतारें,
ऐ शकील! सच्चाई को हमेशा पुकारें।

सजदा है वो जो डर से हो ख़ुदा का,
जन्नत है इनाम, वो प्यारा-सा सदा का।

इल्म के रास्ते से जो दौलत कमाए,
शकील वही नेकियों का गहना बनाए।








Qualified Entrance

Shakil Ansari