Tuesday, 17 February 2026

बरेलवी तहरीक (Ahl-e-Sunnat wa Jamaat) – एक मुख़्तसर मगर गहरी झलक

बरेलवी क्या है? (सादा अल्फ़ाज़ में समझें)

बरेलवी तहरीक असल में सुन्नी इस्लाम की एक इस्लाही (reform) और रूहानी तहरीक है, जो हज़रत मुहम्मद ﷺ की सुन्नत, चारों फ़िक्ही मज़ाहिब (ख़ास तौर पर हनफ़ी), और सूफ़िया की तालीमात को मज़बूती से पकड़ने पर ज़ोर देती है।
इसका नाम उत्तर प्रदेश के शहर बरेली से जुड़ा है, जहाँ के बड़े आलिम Ahmed Raza Khan Barelvi ने 19वीं–20वीं सदी में इसकी बुनियाद मज़बूत की।

बरेलवी उलमा अपने आपको Ahl-e-Sunnat wa Jamaat कहते हैं—यानि वो जमाअत जो नबी ﷺ की सुन्नत और उम्मत की इत्तेहाद (unity) पर क़ायम रहे।
Bareilly उत्तर प्रदेश का एक पुराना शहर है, जो इल्म-ओ-अदब और सूफ़ियाना माहौल के लिए जाना जाता है।
यहीं Ahmed Raza Khan Barelvi का मदरसा Manzar-e-Islam क़ायम हुआ, जहाँ से बरेलवी तहरीक ने तालीमी और फिक्री शक्ल इख़्तियार की।

अहमद रज़ा ख़ान ने Fatawa-e-Razawiyya जैसी बड़ी किताब लिखी, जिसमें उन्होंने:

नबी ﷺ की शान-ओ-मक़ाम पर ज़ोर दिया

सूफ़ियाना अमल (औलिया की मोहब्बत, उर्स, मिलाद) की हिमायत की

अशअरी/मातुरीदी अकीदे और हनफ़ी फ़िक्ह की ताईद की
इल्मी असास (बुनियादी फ़िक्र)

बरेलवी तहरीक इन उसूलों पर क़ायम है:

📖 क़ुरआन और हदीस की पैरवी

🕌 चारों सुन्नी मज़ाहिब (हनफ़ी, शाफ़ई, मालिकी, हंबली) की एहतिराम

🧠 इल्म-उल-कलाम (अशअरी, मातुरीदी)

🌿 सूफ़ी सिलसिले – क़ादिरी, चिश्ती, नक़्शबंदी, सुहरवर्दी

❤️ औलिया-ए-किराम से मोहब्बत और तवस्सुल
बरेलवी तहरीक कोई नया मज़हब नहीं, बल्कि सुन्नी इस्लाम की पारंपरिक रूहानी तज्दीद (revival) है।

इसका मरकज़ी ख़याल नबी ﷺ की शान, सुन्नत की पैरवी, और सूफ़ियाना मोहब्बत है।

अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी ने इसे इल्मी और फिक्री शक्ल दी।

मदरसों के ज़रिये यह तहरीक आज भी दीऩी तालीम, फ़तवा और दावत का काम कर रही है।
2000 के आस-पास तख़मीना लगाया गया कि तक़रीबन 20 करोड़ से ज़्यादा अफ़राद इस फिक्री रवायत से जुड़े हुए हैं, ज़्यादातर हिंदुस्तान और पाकिस्तान में, लेकिन ब्रिटेन, अफ्रीका, बांग्लादेश, श्रीलंका और अमरीका तक इसका असर है।



बरेलवी तहरीक असल में सुन्नी इस्लाम की एक तहरीक है, जो अपने आपको Ahl-e-Sunnat wa Jama'at यानी “रसूल ﷺ की सुन्नत और जमाअत के रास्ते” का पैरोकार कहती है। ये लोग फिक़्ह में ज़्यादातर हनफ़ी और कहीं-कहीं शाफ़ई मस्लक पर चलते हैं, अकीदे में मातुरीदी और अशअरी उसूल मानते हैं, और तसव्वुफ़ में क़ादिरी, चिश्ती, नक्शबंदी, सुहरवर्दी सिलसिलों से ताल्लुक रखते हैं।
इस तहरीक का बड़ा मक़सद ये रहा कि मुसलमानों को फिर से सुन्नत और शरीअत की तरफ़ लाया जाए, और रसूल ﷺ की सीरत से मुहब्बत व अदब को ज़िंदा रखा जाए।

बरेलवी तहरीक के बुनियादी उसूल

फ़िक़्ह में – ज़्यादातर लोग हनफ़ी मस्लक को मानते हैं।

अक़ीदा में – मातुरीदी या अशअरी तरीक़ा।

तसव्वुफ़ (सूफियत) – क़ादरी, चिश्ती, नक्शबंदी, सुहरवर्दी सिलसिलों से लगाव।

नबी ﷺ की मोहब्बत और अदब – मिलाद, नात, दरूद, और औलिया की ताज़ीम पर ज़ोर।

अपने आपको सुन्नी इस्लाम की पुरानी रवायत का सिलसिला मानते हैं।

फैलाव
ये तहरीक हिंदुस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान, श्रीलंका, यूके, साउथ अफ्रीका और अमेरिका तक फैली हुई है।
2000 के आस-पास इसके तक़रीबन 20 करोड़ से ज़्यादा मानने वाले बताए जाते हैं, ज़्यादातर दक्षिण एशिया में।


तमाम मदारिस/जामिआत के सिर्फ़ नाम पेश किए जा रहे हैं:

Al Jamiatul Ashrafia

Jamia Al-Karam

Al Madeena Islamic Complex

Al-Jame-atul-Islamia

Aleemiyah Institute of Islamic Studies

Ashraf ul Madaris

Dar-ul-Madinah

Darul Huda Islamic University

Darul Uloom Pretoria

Jamia Ahmadiyya Sunnia Kamil Madrasa

Jamia Amjadia Razvia

Jamia Naeemia Lahore

Jamia Naeemia Moradabad

Jamia Nizamia

Jamia Nizamia Ghousia

Jamia Nusrathul Islam

Jamia Uloom-i-Sharia

Jamia-tul-Madina

Jamiatur Raza

Jamia Qadria Rizvia

Jamia Nizamia Rizvia

Jamia Faridia

Jamia Rizvia Zia Ul Uloom

Jamia Aminia Rizvia

Markaz-E-Mustafa

Madarganj Abdul Ali Mirza Kasem Kamil Madrasah

Manzar-e-Islam

Minhaj-ul-Quran International

Tanzeem ul Madaris Ahle Sunnat

Faizan E Madina




देखिए, हर मस्लक अपने आपको कुरआन-सुन्नत का सही समझने वाला बताता है।
बरेलवी तहरीक का ज़ोर नबी ﷺ की मोहब्बत, औलिया से लगाव, और सुन्नी परंपरा की हिफ़ाज़त पर है।

बरेलवी तहरीक (Ahl-e-Sunnat wa Jamaat) – एक मुख़्तसर मगर गहरी झलक

बरेलवी क्या है? (सादा अल्फ़ाज़ में समझें) बरेलवी तहरीक असल में सुन्नी इस्लाम की एक इस्लाही (reform) और रूहानी तहरीक है, जो हज़रत मुहम्मद ﷺ क...

Shakil Ansari